
हरिद्वार(आरएनएस)। स्वामी रामदेव ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन सनातन संस्कृति को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आहुति हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानवता को दिशा देने वाला शाश्वत सत्य है। यह बातें उन्होंने हरकी पैड़ी स्थित मालवीय घाट पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कही। गुरुवार को श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में आयोजित कथा के चौथे दिन श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के प्रकटोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्म लीलाओं का ऐसा मार्मिक चित्रण किया कि श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
स्वामी रामदेव ने कथा व्यास वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी के कथा वाचन की सराहना करते हुए कहा कि वे निरंतर भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के संस्कार हमारे डीएनए में समाहित हैं। उन्होंने कहा कि हमारे भीतर देवत्व, रामत्व, राधत्व और शिवत्व विद्यमान है। हमारे आचार, विचार, आहार और व्यवहार में हिन्दुत्व और सनातन के शाश्वत सत्य रचे-बसे हैं।

