
ऋषिकेश(आरएनएस)। प्रकृति के सुकुमार कवि और छायावाद के प्रमुख स्तंभ सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर शनिवार को लेखक गांव थानो में “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड भाषा संस्थान, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और लेखक गांव के संयुक्त तत्वावधान में नालंदा पुस्तकालय एवं अटल प्रेक्षागृह में हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. कुमार विश्वास ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि लेखक गांव केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और संवेदनाओं का जीवंत केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि एक कविता लिखनी है तो पहले हजार कविताएं पढ़नी होंगी।” उन्होंने युवाओं से मोबाइल पर कम समय बिताकर पुस्तकों और साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में बाल कवियों ने पंत की कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। दूसरे सत्र की शुरुआत बच्चों द्वारा लेखक गांव के कुलगीत “लेखक गांव हमारा है” के सामूहिक गायन से हुई। इस दौरान “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि पंत का साहित्य भारतीय चिंतन, प्रकृति और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि लेखक गांव साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक संवाद का राष्ट्रीय केंद्र बनकर उभर रहा है तथा “सुमित्रानंदन पंत साहित्य पर्यटन पथ” भारतीय साहित्यिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने का अभिनव प्रयास है। विशिष्ट अतिथि पर्यावरणविद् पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने साहित्य और प्रकृति के गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डॉ. मायावती ढकरियाल, डॉ. कमला पंत, डॉ. विद्या सिंह, डॉ. शशांक शुक्ला और संजय महर कार्यक्रम का संयोजन पूजा पोखरियाल द्वारा तथा संचालन डॉ. बीना बेंजवाल द्वारा किया गया। मौके पर राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, भारतीय अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता डॉ. आरुषि निशंक, लेखक गांव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’, डॉ. नीरजा शर्मा कुकरेती, प्रो. प्रदीप भारद्वाज, डॉ. राकेश सुन्दरियाल, डॉ. बेचैन कंडियाल सहित कई साहित्यकार, शिक्षाविद और युवा रचनाकार मौजूद रहे।

