
बागेश्वर(आरएनएस)। आशा स्वास्थ्य कार्यकर्त्री संगठन के बैनर तले कार्यकर्त्रियों ने बुधवार को उप जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। उन्होंने राज्य कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम 18 हजार रुपये वेतन की मांग की। संगठन का कहना है कि देश में 11 लाख आशाएं ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में टीकाकरण, स्वच्छता, जच्चा-बच्चा देखभाल, पल्स पोलियो, टीबी मुक्त भारत, डेंगू, कुष्ठ रोग जैसे तमाम काम कर रही हैं। ये सभी काम सरकारी और राज्य कर्मचारियों के हैं, लेकिन सरकारें आशाओं को अपना कर्मचारी मानने को तैयार नहीं हैं। संगठन की मांग है कि उन्हें तुरंत राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। ज्ञापन में आशाओं ने आठ प्रमुख मांगें रखी हैं। इसमें न्यूनतम 18 हजार मासिक वेतन, दुर्घटना पर पांच लाख और मृत्यु पर 10 लाख मुआवजा, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख एकमुश्त राशि शामिल है। इसके अलावा अनुभवी आशाओं को टीकाकरण का प्रशिक्षण, योग्यता धारी आशाओं की एएनएम पद पर पदोन्नति, सफल प्रसव पर यात्रा भत्ता या इलेक्ट्रिक स्कूटी और पल्स पोलियो के 150 रुपये को बढ़ाकर 800 रुपये प्रतिदिन करने की मांग की गई है। संगठन ने ज्ञापन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को भेजा है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठन का पंजीयन संख्या 330 है और यह भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध है।
