
ऋषिकेश(आरएनएस)। आधुनिक संसाधनों जैसे फ्रिज और वाटर कूलर के बावजूद लोग अब फिर से पारंपरिक मिट्टी के मटकों की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। शुद्ध और प्राकृतिक रूप से ठंडा पानी पाने के लिए इन मटकों की लोकप्रियता एक बार फिर बढ़ गई है। बढ़ती गर्मी के तेवर के साथ बाजार में मिट्टी के मटकों की मांग भी तेजी से बढ़ती जा रही है। डोईवाला के प्रेमनगर बाजार क्षेत्र में कुम्हार समुदाय के घरों में इन दिनों लगातार चाक घूमते नजर आ रहे हैं। राम सिंह प्रजापति और विशाल प्रजापति के परिवार दिन-रात मटकों के निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। राम सिंह प्रजापति ने बताया कि इस बार मौसम शुरू होते ही मटकों की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। लोग अब फिर समझ रहे हैं कि मिट्टी के मटके का पानी स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी होता है। पहले की तुलना में इस बार बिक्री बेहतर है। विशाल प्रजापति ने कहा कि हमारा यह पारंपरिक काम पीढ़ियों से चला आ रहा है। पहले कुछ समय के लिए मांग कम हो गई थी, लेकिन अब फिर से लोग मिट्टी के बर्तनों की ओर लौट रहे हैं। इससे हमारी मेहनत का सही मूल्य मिल रहा है। स्थानीय बाजार में मटकों की बढ़ती बिक्री ने कुम्हार परिवारों को राहत दी है। लगातार बढ़ती मांग के चलते आने वाले दिनों में उत्पादन और बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से मटकों की मांग आने लगी है, जिससे यह पारंपरिक उद्योग फिर से गति पकड़ता दिख रहा है।

