

हल्द्वानी। बेसिक संवर्ग से एलटी संवर्ग में समायोजित शिक्षकों को पूर्व सेवा जोड़कर चयन और प्रोन्नत वेतनमान का लाभ देने की मांग को लेकर शिक्षक संगठनों ने फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने शासन पर मामले में लगातार हीलाहवाली का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रभावित शिक्षक अब बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
कार्मिक एकता मंच और राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच के पदाधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया गया कि सोमवार को अल्मोड़ा पहुंच रहे शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के समक्ष इस मामले को उठाया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मंच के संस्थापक अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 की सेवा नियमावली में ‘समायोजन’ शब्द था और वर्ष 2009 से 2012 तक समायोजित शिक्षकों को चयन और प्रोन्नत वेतनमान का लाभ दिया जाता रहा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में नियमावली में बदलाव कर ‘समायोजन’ की जगह ‘पदोन्नत’ शब्द जोड़ दिया गया, जिसके बाद यह लाभ बंद कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने भी बेसिक संवर्ग से माध्यमिक में जाने की प्रक्रिया को पदोन्नति नहीं बल्कि मर्जर माना है, लेकिन इसके बावजूद कई शिक्षक अब भी लाभ से वंचित हैं। मंच का आरोप है कि शासन एक शब्द के तकनीकी बदलाव के आधार पर हजारों शिक्षकों की पूर्व सेवा अवधि को नजरअंदाज कर रहा है।
मंच के अनुसार वर्ष 2021, 2022 और 2024 में आंदोलन के बाद निदेशालय ने 25 जून 2024 को प्रस्ताव भेजा था कि नियमावली में फिर से ‘समायोजन’ शब्द जोड़ा जाए और पूर्व सेवा जोड़कर वेतनमान का लाभ दिया जाए, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक लंबित है।
मंच ने कहा कि नवंबर 2025 में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने इस लाभ को उचित माना था, लेकिन अब तक आदेश जारी नहीं हो सका है।
राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच के अध्यक्ष दिगंबर फुलोरिया और महासचिव सुजान बुटोला ने चेतावनी दी कि यदि जल्द शासनादेश जारी नहीं हुआ तो जून में निदेशालय पर फिर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

