
देहरादून(आरएनएस)। झड़ी पानी स्थित उत्तर रेलवे की भूमि पर अनाधिकृत कब्जे को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म है। इस बार रेलवे ने आशु गुप्ता पुत्र पदम गुप्ता को नोटिस देकर अनाधिकृत कब्जे को हटाने की कार्रवाई की। इसका स्थानील लोगों ने जमकर विरोध किया। कहा कि रेलवे बार बार स्थानीय लोगों को धमका कर उनकी रजिस्ट्री की भूमि को अपना बता परेशान कर रहा है। उत्तर रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर शिव सिंह रावत के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची। लोगों के कड़े विरोध को देखते हुए कार्रवाई नहीं कर पाई व समझौता हुआ। निर्णय लिया गया कि संयुक्त रूप से भूमि सीमांकन नपत के लिए नगर पालिका, राजस्व विभाग व रेलवे की संयुक्त टीम गठित किया जाना उचित होगा। टीम द्वारा विधिवत, संबंधित पक्षकारों के सम्मुख सीमांकन की कार्रवाई की जाएगी। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सीमांकन की कार्रवाई तक कोई पक्ष मौके पर निर्माण कार्य नहीं करेंगे, तथा भूमिधरी की व रेलवे की सीमा का निर्धारण किया जाना है। इस पत्र में दोनो पक्षों के हस्ताक्षर किए। कानूनगो विनोद जोशी ने कहा कि रेलवे व स्थानीय व्यक्ति के बीच सीमा विवाद के कारण यहां आए हैं। इसमें दोनों पक्ष के बीच तय हुआ है कि नगर पालिका व रेलवे के द्वारा संयुक्त सीमांकन किया जाएगा। पहले सीमांकन किया जा चुका है लेकिन अब पुनः सीमांकन किया जाएगा। भूमिधरों के प्रतिनिधि अजय गोयल ने कहा कि रेलवे व भूमिधरों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है व पहले भी दो बार नगर पालिका व राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन कर मुनारबंदी की जा चुकी है लेकिन रेलवे सहयोग नहीं कर रहा है। बार बार स्थानीय लोगों को परेशान किया जा रहा है। इस बार स्वयं रेलवे विभाग मौजूद हुआ है, जिसमें तय किया गया कि जब तक सीमांकन नहीं होता रेलवे कुछ नहीं करेगा। आयुक्त गढ़वाल मंडल की ओर से पत्र दाखिल किया जा चुका है कि सीमांकन हो चुका है व मुनाबंदी की जा चुकी है जिस पर रेलवे ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। रेलवे व स्थानीय लोगों का कोई विवाद नहीं बल्कि सीमा का विवाद है, सीमा विवाद 1940 में विवाद को सेटलमेंट अधिकारी ने सेटल किया है व राजस्व विभाग के नक्शे में चिन्हित किया गया है। आदित्य गुप्ता ने बताया कि उनकी भी यहां जमीन है लेकिन हमारी जमीन पर रेलवे क्लेम कर रहा है, लोग पढ़े लिखे तो हैं लेकिन अपने अधिकारों का पता नहीं है।इसकी वजह से रेलवे वाले शोषण कर रहे हैं। लोगों ने छोटी छोटी जमीने लेकर अपने मकान बनाये हैं और रजिस्ट्री की है। निवासी अनुपमा गुप्ता ने बताया कि उनकी रजिस्ट्री ब्रिटिश काल से है लेकिन उन्हें बार बार परेशान किया जा रहा है।

