
देहरादून। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में एमबीबीएस दाखिलों के लिए संदिग्ध दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद चार अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। जांच में चारों अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। सभी ने एक ही कथित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह के नाम का परिचय पत्र लगाया था, लेकिन कलक्ट्रेट की संबंधित पंजिका में इस नाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
जांच में पते और मोबाइल नंबर भी संदिग्ध
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के निर्देश पर जिलाधिकारी कार्यालय ने तहसील प्रशासन से चारों मामलों की दस्तावेजी और स्थलीय जांच कराई। जांच में आवेदन में दर्ज पतों पर संबंधित अभ्यर्थी या उनके परिवार नहीं मिले। कुछ मामलों में आवेदन में दिए गए मोबाइल नंबर भी दूसरे लोगों के निकले।
तृप्ति पुत्री रामपाल सिंह, स्वाति पुत्री जगपाल सिंह, खुशी पुत्री प्रवीण कुमार और परी पुत्री अरविन्द कुमार के आवेदनों में एक ही कथित स्वतंत्रता सेनानी के नाम का परिचय पत्र लगाया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह का नाम नहीं मिलने पर प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल खड़े हुए।
शपथपत्रों और दस्तावेजों में भी मिली गड़बड़ी
जांच में चारों आवेदनों में पेंशन पट्टा, निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता सेनानी परिचय पत्र के बजाय आधार कार्ड लगाए जाने की बात सामने आई। आधार कार्ड में दर्ज पतों पर भी संबंधित परिवार नहीं मिले। शपथपत्रों की जांच में भी विसंगतियां मिलीं।
स्वाति के शपथपत्र में दूसरे व्यक्ति का टंकित कथन पाया गया, जबकि परी के दस्तावेजों में नाम और पारिवारिक विवरण को लेकर अंतर सामने आया। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर चारों प्रमाणपत्रों को संदिग्ध मानते हुए निरस्त करने की संस्तुति की गई।
10 सितंबर को प्रमाणपत्र निरस्त
जांच रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह ने 10 सितंबर को चारों स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। इसके बाद प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने भी चारों एमबीबीएस दाखिले रद्द कर दिए हैं।
चार सीटें अगले काउंसलिंग चरण में जाएंगी
चारों सीटों को अब रिक्त माना जाएगा और अगले चरण की काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। एक ही कथित स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर चार दावों और संदिग्ध दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आने के बाद प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दाखिले रद्द करने के बाद प्रशासन संदिग्ध दस्तावेज तैयार करने और इस्तेमाल करने वाले लोगों की जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई करता है।


