
रुड़की(आरएनएस)। विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में इस वर्ष सालाना ठेकों की प्रक्रिया के दौरान शीरमाल को सोहन हलवा-पराठा ठेके में शामिल किए जाने से छोटे व्यापारियों में नाराजगी है। वर्षों से शीरमाल बेचकर गुजर-बसर करने वाले दुकानदारों ने इसे अपने रोजगार के लिए खतरा बताया है। वहीं, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि शीरमाल की बिक्री पर किसी भी ठेकेदार का एकाधिकार नहीं होगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले सोहन हलवा-पराठा ठेके में केवल सोहन हलवा और हलवा-पराठा की बिक्री शामिल थी, जिसके लिए दरगाह प्रशासन एक दुकान आवंटित करता था। इस बार ठेकेदार के प्रार्थना पत्र पर शीरमाल को भी ठेके में शामिल कर दिया गया। इससे वर्षों से शीरमाल बेचने वाले छोटे दुकानदारों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शीरमाल केसर, मैदा, दूध, चीनी और घी से तैयार की जाने वाली पारंपरिक मुगलई रोटी है, जिसे तंदूर में पकाकर चाय और नाश्ते के साथ खाया जाता है। क्षेत्र के कई परिवार वर्षों से इसकी बिक्री कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि यदि इस पर ठेका व्यवस्था प्रभावी हुई तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह साबिर पाक देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीनों की आस्था का केंद्र है। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारियों को गुमराह कर समय-समय पर नए नियम लागू कराने का प्रयास किया जाता है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में चाय, लंगर-नियाज, होटल और अन्य छोटे कारोबार भी ठेका प्रणाली के दायरे में आ सकते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी।
उधर, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक राम चंद्र शेट ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने दरगाह कार्यालय से संबंधित पत्रावली तलब कर पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी दुकानदारों को शीरमाल बेचने का पूरा अधिकार है। यदि किसी स्तर पर किसी को इसका एकाधिकार देने या ऐसा प्रयास करने की बात सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
