
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और जारी समन को रद्द करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे में अभियोजन की आवश्यक स्वीकृति का कोई उल्लेख नहीं है, इसलिए मजिस्ट्रेट के आदेश टिक नहीं सकते।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति का अभाव होने के कारण मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश निरस्त किए जाते हैं। मामला राहुल गांधी की 17 नवंबर 2022 को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान की गई उन टिप्पणियों से जुड़ा था, जिनमें उन्होंने सावरकर को अंग्रेजों का सहयोगी और पेंशन लेने वाला बताया था।
इन टिप्पणियों को लेकर अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने आपराधिक शिकायत दायर की थी। जून 2023 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एफआईआर की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद सत्र न्यायालय ने मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के पास भेजा, जहां दिसंबर 2024 में राहुल गांधी को तलब किया गया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने पहले समन पर रोक लगाई और अब अंतिम सुनवाई में आपराधिक शिकायत को ही रद्द कर राहुल गांधी को बड़ी राहत प्रदान की।

