
बागेश्वर(आरएनएस)। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने कीड़ाजड़ी बरामदगी के एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और विवेचना को संदिग्ध मानते हुए आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के वर्ष 2023 के छह माह के साधारण कारावास और 500 रुपये अर्थदंड के फैसले को भी निरस्त कर दिया। मामले के अनुसार, 12 जुलाई 2020 को कपकोट पुलिस ने चीराबगड़ के पास झूनी निवासी देवेंद्र सिंह को 114 ग्राम कीड़ाजड़ी के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया था। निचली अदालत ने सात अगस्त 2023 को देवेंद्र को भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत दोषी मानते हुए छह माह के कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी।इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सत्र न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि बरामद कीड़ाजड़ी किसी आरक्षित वन या वन क्षेत्र से लाई गई थी। पुलिस द्वारा मौके पर तैयार किए गए दस्तावेजों में थाने में एफआईआर दर्ज होने से पहले ही प्राथमिकी संख्या अंकित थी, जिससे पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध प्रतीत होती है। इसके अलावा, बरामद माल को 12 से 25 जुलाई के बीच मालखाने में सुरक्षित रखे जाने संबंधी कोई रजिस्टर भी अभियोजन पक्ष अदालत में पेश नहीं कर सका। अदालत ने यह भी पाया कि आबादी वाले क्षेत्र में दिन के समय चार घंटे तक चली पुलिस कार्रवाई के बावजूद टीम किसी स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं कर सकी। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के संबंध में भी आरोपी से कोई सवाल नहीं पूछा गया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी पर लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इसके बाद देवेंद्र सिंह को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।
