
बागेश्वर। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीणों को वन विभाग की प्रक्रियाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से कपकोट और ग्लेशियर वन क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में बंदरों और जंगली सुअरों से फसलों तथा बागानों को हो रहे नुकसान पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रभागीय वनाधिकारी प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि जिले में जल्द ही बंदरबाड़ा स्थापित किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों से पकड़े जाने वाले बंदरों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत यहां रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के वन प्रभागों में पशु चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और बागेश्वर वन प्रभाग में भी शीघ्र पशु चिकित्सक की तैनाती की जाएगी, जिससे बंदरबाड़े में रखे गए वन्यजीवों की समुचित देखभाल सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला में जंगली सुअरों से फसलों को होने वाले नुकसान पर भी चर्चा हुई। वन विभाग ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए एक पायलट परियोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत कपकोट, गरुड़ और बागेश्वर विकासखंड के तीन-तीन गांवों का चयन कर रिमोट सेंसिंग तकनीक से युक्त विशेष पिंजरों का उपयोग किया जाएगा। इस अभियान में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
डीएफओ ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या का स्थायी समाधान विभाग, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने ग्रामीणों को वन्यजीवों से होने वाली क्षति की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और राहत-मुआवजा संबंधी प्रावधानों की भी जानकारी दी।
कार्यशाला में वन क्षेत्राधिकारी कपकोट नारायण दत्त पांडे, ग्लेशियर रेंज की डॉली डोभाल सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, ग्राम प्रधान, सरपंच, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

