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घरेलू हिंसा मामले में पत्नी के पक्ष में एकपक्षीय फैसला

RNS INDIA NEWS 07/07/2026
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विकासनगर(आरएनएस)। न्यायिक मजिस्ट्रेट जतिन मित्तल ने घरेलू हिंसा के एक मामले में महिला अफसाना के पक्ष में एकपक्षीय फैसला सुनाया है। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों से पहली नजर में यह साबित होता है कि महिला के साथ घरेलू हिंसा, दहेज के लिए प्रताड़ना और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न हुआ। अफसाना ने अदालत को बताया कि उसका निकाह 20 दिसंबर 2021 को साजिद के साथ हुआ था। शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने दहेज में दो लाख रुपये और अन्य सामान की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर गर्भावस्था के दौरान उसके साथ मारपीट की गई और उसे घर से निकाल दिया गया। बाद में समझौता हुआ, लेकिन प्रताड़ना जारी रही। बेटे के जन्म के बाद भी स्थिति नहीं बदली और मई 2023 में उसे बच्चे सहित घर से निकाल दिया गया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में फोन पर तीन तलाक दिया गया और हलाला के लिए दबाव बनाया गया। मामले में अदालत ने पति और अन्य पक्षों को नोटिस भेजे, लेकिन उनके पेश नहीं होने पर 9 अप्रैल 2025 को एकपक्षीय कार्रवाई की गई। महिला संरक्षण अधिकारी की रिपोर्ट, पीड़िता के शपथपत्र और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने महिला के आरोपों को सही माना। हालांकि, अदालत ने मासिक भरण-पोषण की नई मांग खारिज कर दी, क्योंकि परिवार न्यायालय पहले ही 27 जनवरी 2025 को पत्नी और बेटे के लिए 7,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण तय कर चुका है। अदालत ने आदेश दिया कि पति पत्नी और बेटे के साथ किसी भी तरह की घरेलू हिंसा नहीं करेगा। उन्हें रहने के लिए साझा घर उपलब्ध कराएगा। यदि ऐसा संभव नहीं है तो हर महीने 5,000 रुपये किराया देगा। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए एक लाख रुपये एक महीने के भीतर देने होंगे। साथ ही महिला का पूरा स्त्रीधन लौटाना होगा, अन्यथा उसकी जगह एक लाख रुपये एकमुश्त देने होंगे।

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