
नई टिहरी। सरकारी विद्यालयों के प्रति अभिभावकों का घटता रुझान टिहरी जिले में शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। नए शिक्षा सत्र में छात्र संख्या शून्य होने के कारण जिले के 25 सरकारी विद्यालयों पर ताले लग गए हैं। कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले इन स्कूलों में अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
सरकार की ओर से सरकारी विद्यालयों को सशक्त बनाने और छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन उनका अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश निजी विद्यालयों में करा रहे हैं, जिसके चलते हर वर्ष कई सरकारी स्कूल छात्रविहीन होकर बंद होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं।
जिला शिक्षा विभाग के अनुसार इस शिक्षा सत्र में छात्र संख्या शून्य होने के कारण 20 प्राथमिक विद्यालय, चार जूनियर हाईस्कूल और एक उच्च प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए हैं। इसके अलावा राजकीय इंटर कॉलेज नरेंद्रनगर में केंद्रीय विद्यालय खुलने के कारण उसे दूसरे विद्यालय में समायोजित कर दिया गया है।
सबसे अधिक प्रभावित विद्यालय चंबा, देवप्रयाग, भिलंगना, जाखणीधार, जौनपुर, थौलधार, प्रतापनगर, कीर्तिनगर और नरेंद्रनगर विकासखंडों में हैं। बंद होने वाले विद्यालयों में पीएस चमोगी, गौसारी, कुल्पी, बुडोकोट, डांडा किरोड़, डोब, तोड़खंड, सरूणा, कोटगा, सांदणा, बुरांट, वनगांव, बमराड़ी, विकोल, कोलधार, सुकरी, लूसी, थापली और नैल के साथ-साथ जेएच मठियाण गांव, किमोली, हरडाखाल, कुखई तथा यूपीएस धर्मनगर बगवान शामिल हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) पूनम चौहान ने बताया कि छात्र संख्या शून्य होने के कारण इन विद्यालयों को बंद करना पड़ा है। संबंधित शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में तैनात कर दिया गया है, जबकि विद्यालय भवनों की देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधानों को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।


