
विधि, शिक्षा और मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से युवाओं की भूमिका पर हुई चर्चा, विद्यार्थियों ने भी रखे विचार
अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के विधि विभाग में शुक्रवार को ‘युवा और राष्ट्र निर्माण : एक अंतर्विषयक दृष्टिकोण’ विषय पर विशेष अकादमिक व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका को विधि, शिक्षा, मनोविज्ञान और सामाजिक विकास के विभिन्न दृष्टिकोणों से समझाया गया। साथ ही विद्यार्थियों में जिम्मेदार नागरिकता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया।
युवाओं को अनुशासन और संवैधानिक दायित्वों से जुड़ने का आह्वान
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों, संवैधानिक दायित्वों और सामाजिक जिम्मेदारियों को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारी संस्थाओं का दायित्व नहीं है, बल्कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण है।
विधिक अधिकारों और कर्तव्यों की दी जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अनामिका सिंह ने युवाओं को कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों, न्याय तक पहुंच और विधिक जागरूकता के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी युवाओं को अपने अधिकारों की रक्षा करने के साथ ही समाज में विधि के शासन को मजबूत करने के लिए प्रेरित करती है। अधिवक्ता भावना जोशी ने युवाओं की सामाजिक और कानूनी भूमिका पर विचार रखते हुए कानून को वास्तविक जीवन में न्याय, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का आग्रह किया।
विधि विद्यार्थियों की सामाजिक भूमिका पर जोर
विधि संकाय के विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. ए.के. नवीन ने कहा कि विधि विद्यार्थियों की भूमिका केवल भविष्य में अधिवक्ता या न्यायिक अधिकारी बनने तक सीमित नहीं है। वे समाज में संवैधानिक चेतना, न्याय और विधिक जागरूकता के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षा और मनोवैज्ञानिक विकास को बताया जरूरी
शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. रिजवाना सिद्दीकी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि शिक्षा युवाओं में नेतृत्व क्षमता, विवेकपूर्ण निर्णय और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करती है। मनोविज्ञान संकाय की डॉ. सुनीता कश्यप ने युवाओं के मानसिक एवं भावनात्मक विकास, आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला।
विद्यार्थियों ने प्रश्न और विचार रखे
कार्यक्रम में प्रो. डी.पी. यादव, प्रो. अरशद हुसैन, डॉ. दलवीर लाल, डॉ. पी.एस. बोरा, डॉ. फराह दीवा और डॉ. प्रियंका मजूमदार सहित शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। व्याख्यान के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर विचार रखे और विद्यार्थियों से अपने ज्ञान एवं क्षमताओं का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का आयोजन एलएल.बी. पंचम सेमेस्टर के अनिरुद्ध पंत ने किया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित प्रश्न और विचार प्रस्तुत किए। अंत में वक्ताओं एवं उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

