
अल्मोड़ा। जागेश्वर धाम क्षेत्र में पवित्र जटागंगा के सहायक जनगड़ गदेरे पर प्रस्तावित सिंचाई योजना को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और हैरानी दोनों देखने को मिल रही है। जिस गदेरे में इस समय पानी नाममात्र का है, वहां सिंचाई विभाग द्वारा पाइपलाइन बिछाने की तैयारी किए जाने पर लोगों ने सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनगड़ गदेरे में वर्तमान में एक-दो इंच पानी भी नहीं है, इसके बावजूद विभाग चार इंच मोटी पाइपलाइन डालने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस स्थान पर यह योजना प्रस्तावित है, उसके ठीक नीचे पहले से ही जल संस्थान की पेयजल योजना संचालित हो रही है, जिससे जागेश्वर धाम और आसपास के क्षेत्रों को पानी की आपूर्ति होती है। इसी गदेरे से कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवास गृह तक भी पेयजल लाइन जुड़ी हुई है। लोगों का कहना है कि गर्मियों से पहले ही जटागंगा और उसका सहायक जनगड़ गदेरा सूखने की स्थिति में पहुंच जाता है। ऐसे में इसी स्रोत से सिंचाई योजना शुरू करना न केवल पेयजल व्यवस्था को प्रभावित करेगा, बल्कि धार्मिक महत्व की जटागंगा के अस्तित्व पर भी असर डाल सकता है। गुरुवार को जब ब्रह्मकुंड के ऊपर सड़क किनारे पाइप उतारे जा रहे थे, तभी स्थानीय लोगों को इस योजना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सूखते जलस्रोत पर सिंचाई योजना बनाना अव्यावहारिक है और इससे सरकारी धन की बर्बादी होगी। उन्होंने अधिकारियों से इस योजना को तत्काल रोकने और जटागंगा के सहायक गदेरे के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर तनुज वर्मा ने बताया कि उस गदेरे में पहले से पेयजल योजना संचालित होने की जानकारी हाल ही में उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मौके का निरीक्षण किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


