
देहरादून। उत्तराखंड में रोजगार की स्थिति का एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। शिक्षा विभाग में परिचारक, स्वच्छक और सह-चौकीदार के पदों पर निकली भर्ती के लिए उच्च शिक्षित युवा अपनी डिग्रियां छिपाकर खुद को आठवीं पास दर्शाकर आवेदन कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से 2364 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, जिसमें करीब 15 हजार रुपये मासिक वेतन निर्धारित है। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। इस बार आवेदन प्रक्रिया में उच्च शैक्षिक योग्यता स्वीकार नहीं की जा रही है, जिसके चलते स्नातक और परास्नातक युवा भी आठवीं पास की अंकतालिका लगाकर आवेदन करने को मजबूर हैं।
स्कूलों में इन दिनों ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ गई है, जो वर्षों बाद अपनी आठवीं की अंकतालिका लेने पहुंच रहे हैं। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गौजाजाली के प्रभारी प्रधानाध्यापक विवेक पांडे ने बताया कि बड़ी संख्या में युवक-युवतियां प्रमाण पत्र लेने स्कूल आ रहे हैं।
धारी ब्लॉक के चुरीगाड़ निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज से स्नातक किया है। पहले उन्होंने आवेदन में अपनी स्नातक की डिग्री लगाई, लेकिन आवेदन निरस्त हो गया। इसके बाद उन्होंने आठवीं की अंकतालिका लगाकर आवेदन किया, तब प्रक्रिया पूरी हो सकी। इसी तरह हल्द्वानी के तीनपानी क्षेत्र निवासी मीना शर्मा, जिन्होंने डीएसबी परिसर नैनीताल से परास्नातक किया है, वे भी आवेदन के लिए अपने पुराने स्कूल से आठवीं का प्रमाण पत्र लेने पहुंचीं।
भर्ती के तहत विभिन्न जिलों में पद निर्धारित किए गए हैं, जिनमें पौड़ी गढ़वाल में सबसे अधिक 340 पद, टिहरी गढ़वाल में 268, अल्मोड़ा में 254 और नैनीताल में 208 पद शामिल हैं। इसके अलावा पिथौरागढ़, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, चमोली, उत्तरकाशी, चंपावत, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और बागेश्वर में भी पद निर्धारित किए गए हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पदों के अनुरूप न्यूनतम योग्यता तय की गई है। उनका तर्क है कि अधिक योग्यता वाले अभ्यर्थी चयन के बाद अक्सर नौकरी नहीं करते, इसलिए इस बार आवेदन प्रक्रिया में उच्च शैक्षिक योग्यता को शामिल नहीं किया गया है।

