
कोटद्वार(आरएनएस)। बेस अस्पताल में पिछले पांच वर्षों से खराब पड़ी लिथोट्रिप्सी मशीन के मामले में उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले में विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। पदमपुर सुखरो स्थित गुरुराम राय कॉलोनी निवासी अधिवक्ता बीएम गौड़ ने बताया कि उन्होंने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि बेस अस्पताल कोटद्वार में वर्ष 2016 में करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से लिथोट्रिप्सी मशीन स्थापित की गई थी। मशीन के माध्यम से दूरबीन विधि से गुर्दे की पथरी का उपचार किया जाता था लेकिन यह पिछले पांच वर्षों से निष्क्रिय पड़ी हुई है।शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि मशीन के बंद होने से क्षेत्र के मरीजों को उपचार के लिए देहरादून, मेरठ और दिल्ली जैसे शहरों का रुख करना पड़ रहा है जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार ई-मेल के माध्यम से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग के सदस्य गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने शिकायत की प्रति महानिदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, देहरादून को प्रेषित करते हुए निर्धारित तिथि तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने इस प्रकरण को बेस अस्पताल से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ संबद्ध करते हुए 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
