यूक्रेनी सैनिकों ने पीटा, 15 किमी पैदल चलकर पहुंचे रोमानिया बॉर्डर

यूक्रेन से लौटे स्नेहशीष ने बताई आपबीती
मेरठ/कंकरखेड़ा (आरएनएस)। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को खाने पीने की बड़ी समस्या से गुजरना पड़ रहा है। यूक्रेन के सैनिक छात्रों को परेशान कर रहे हैं। 20 यूक्रेन नागरिकों के साथ केवल दो भारतीय छात्रों व एक अन्य देश के नागरिक को रोमानिया बॉर्डर पार करा रहे हैं। यह आपबीती रोहट रोड के सरस्वती विहार स्थित अपने घर पहुंचे स्नेहशीष ने बताई। यूक्रेन से चार छात्र मेरठ पहुंचे।
सरस्वती विहार निवासी स्नेहशीष(19) छह माह पहले एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। उसके पिता आर्मी में नायब सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। छात्र ने 12वीं की पढ़ाई आर्मी स्कूल से की है। वह इबानो फ्रांसिक नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा है। यूनिवर्सिटी के पास ही एक प्राइवेट हॉस्टल में साथियों संग रहता है।
स्नेहशीष ने बताया कि वह साथियों के साथ बस में 10 घंटे का सफर कर यूनिवर्सिटी से कीव पहुंचा। यहां से बस में पांच घंटे का सफर कर रोमानिया बॉर्डर से 15 किमी पहले पहुंचे। इसके बाद पैदल ही बॉर्डर पर पहुंचे। खाने-पीने की चीजों के लिए भी काफी परेशानी हुई।
तीन धमाके देखकर उड़े होश
छात्र ने बताया कि जब वह कॉलेज से निकलकर कीव जा रहे थे तो उनके सामने एक बिल्डिंग पर तीन जबरदस्त धमाके हुए। यह देखकर सभी घबरा गए। डर के साए में ही पूरा सफर तय किया। बॉर्डर पार करने के बाद दो दिन तक वह रोमानिया में रिफ्यूजी कैंप में रहे।
पांच दिन कुछ नहीं खाया
स्नेहशीष को देखकर परिजनों के खुशी की ठिकाना नहीं रहा। खुशी में उनके आंसू निकल आए। उन्होंने बताया कि स्नेहाशीष की वापसी के लिए पांच दिन से कुछ नहीं खाया था।
विधायक ने दिया आशीर्वाद
कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने बुधवार को छात्र के घर पहुंचकर आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों को वापस लाने के लिए दिन रात लगे हुए हैं।
छात्र ने सरकार को दिया धन्यवाद
छात्र स्नेहशीष ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। उसने कहा कि इस विषम परिस्थिति में भी उन्होंने अपने लोगों का साथ नहीं छोड़ा। रोमानिया में भारतीय दूतावास की तरफ से खाने-पीने और रहने की जबरदस्त व्यवस्था की गई है। उम्मीद से ज्यादा भारत सरकार ने छात्रों के लिए सुविधा की है। छात्र ने अन्य भारतीय छात्रों के सलामती के लिए भी भगवान से प्रार्थना की है।