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  • अल्मोड़ा

बंदरों की समस्या को उठाया तो वन विभाग मांग रहा साक्ष्य, कर रहा हीलाहवाली: संजय पाण्डे

RNS INDIA NEWS 09/07/2022
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अल्मोड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता, संजय कुमार पाण्डे द्वारा, 23 जून, 2022 को अल्मोड़ा नगर क्षेत्र में बंदरों के आतंक तथा बंदरों को गाड़ियों में भरकर पहाड़ी क्षेत्रों में भेजे जाने की समस्या सम्बन्धी पत्र जिलाधिकारी को दिया गया था।

वन विभाग ने नगरपालिका पर डाली जिम्मेदारी
नगर क्षेत्र में बंदरों की समस्या के उल्लेखित जिलाधिकारी के पत्र के जवाब में वन विभाग का कहना है कि नगर क्षेत्र में बन्दरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगरपालिका परिषद की है तथा विभाग स्तर पर आतंकित क्षेत्र के बंदरों को बजट की उपलब्धता के आधार पर पकड़कर दूरस्थ जंगलों में छोड़ा जाता है। इसके अतिरिक्त मानव वन्यजीव संघर्ष राहत वितरण नियमावली के सुसंगत नियमों के अनुसार बंदरों के काटे जाने पर मुआवजा प्रदान किये जाने का कोई प्राविधान नहीं है।

साथ ही पत्र के जवाब में वन विभाग ने कहा कि पूर्व में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा अध्यक्ष, नगपालिका परिषद, अल्मोड़ा ने भी शिकायत दर्ज़ कराई के स्तर से कोई साक्ष्य अभी तक प्राप्त नहीं हुए। वन चौकियों के साथ ही पुलिस चौकी पर भी वाहनों की जाँच में पुलिस विभाग का सहयोग प्रदान करने हेतु सम्बन्धितों को लिखा गया है। इस संबंध में वन विभाग ने सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार पाण्डे के शिकायती पत्र दिनांक 23 जून, 2022 के क्रम में अनुरोध किया गया है कि शिकायतकर्ता के पास बंदरों को छोड़ने सम्बन्धी साक्ष्य उपलब्ध हो तो विभाग के कार्यालय को उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया है।

मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे का कहना है कि बंदर को पकड़ने का कार्य वन विभाग का है जबकि वन विभाग कह रहा है कि नगर क्षेत्र में यह कार्य नगर पालिका का है। संजय पांडे ने कहा अगर वन विभाग की मानें तो वहीं इस हिसाब से ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों की समस्या से निपटने का दायित्व ग्रामसभा का होता है। ऐसी स्थिति में बंदरों की समस्या से कौन निजात दिलाएगा। बंदरों के आतंक की वजह से गाँवों से पलायन होता जा रहा है क्योंकि बंदर खेती आदि को नष्ट कर देते हैं। बंदरों द्वारा हाल ही में एक महिला पर हमला किया गया था। जिसके बाद उनका पैर फैक्चर हो गया और करीबन डेढ़ महीने बाद उनकी मृत्यु हो गई। श्री पांडे ने कहा कि इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है और इसके लिए उन्हें लिखित आदेश करने चाहिए। उनका कहना है कि वन विभाग अपने कार्यों से बचने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रश्न उठता है कि जिन बंदरों को पकड़ा जा रहा हैं उन्हें छोड़ा कहां जा रहा है। वन विभाग द्वारा मौखिक आदेश यह दर्शाता है कि विभाग इस मुद्दे के प्रति कितना संवेदनशील है।

बंदरों से संबंधित समस्याओं के लिए सिविल सोयम डिवीज़न में बन्दरबाड़ा बनाया जाना है पर इससे सिवाय भ्रष्टाचार के और कुछ नहीं होगा। बड़े आश्चर्य की बात है कि वन विभाग प्रशासन केवल पेड़ की शाखा पकड़ रहा है जबकि काम जड़ पर होना है, जब तक चौकियों पर चेकिंग अभियान शुरू नहीं होगा तब तक इसका स्थायी समाधान प्राप्त नही होगा। इसके लिए शासन को मौखिक नही बल्कि लिखित रूप में आदेश जारी करना चाहिए।
उन्होंने सभी राजनीतिक प्रतिनिधियों और जन प्रतिनिधियों से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील की है और उन्होंने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जिन बंदरों को पकड़ा जा रहा है उन्हें ही वापस शहर में ही छोड़ दिया जा रहा है। क्योंकि जिस तरीके से साक्ष्य मांगा जा रहा है वो शासन पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। उन्होंने कहा कि अगर मुझे शासन द्वारा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है तो मैं अवश्य साक्ष्य उपलब्ध करवाऊंगा।

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