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शाहीन बाग की तर्ज पर किसान आंदोलन से निपटेगी सरकार

RNS INDIA NEWS 04/02/2021
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  • पुराने प्रस्ताव के इतर नया प्रस्ताव देने की कोई योजना नहीं
  • दिल्ली सीमाओं तक किसानों को लंबे समय तक सीमित रखने की तैयारी
  • पुराने प्रस्ताव पर नहीं माने किसान तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करेगी सरकार

नई दिल्ली  (आरएनएस)। कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन पर अब सरकार और किसानों के बीच धैर्य की जंग होगी। सरकार इस आंदोलन से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ शाहीन बाग आंदोलन की तर्ज पर निपटेगी। सरकार की योजना किसान संगठनों को फिलहाल कोई नया प्रस्ताव न देने और उनकी उपस्थिति दिल्ली की सीमाओं तक ही सीमित रखने की है।
किसान संगठन अगर डेढ़ साल तक कानून को स्थगित रखने और सर्वपक्षीय कमेटी के प्रस्ताव पर नहीं मानी तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने का मन बना लिया है। इस दौरान शाहीन बाग आंदोलन की तर्ज पर ही सरकार आंदोलनकारियों को एक निश्चित जगह पर सीमित रखते हुए अपनी ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं करेगी।

इसलिए लगाए गए बाड़

गाजीपुर, सिंघु बोर्डर और टिकरी बोर्डर पर सडक़ों पर बैरिकेड, बाड़ और कील लगाए गए हैं। इसका उद्येश्य हर हाल में आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली में घुसने देने से रोकना है। इसके अलावा आंदोलनकारियों को एक निश्चित जगह तक ही सीमित रखना है। सरकार ने शाहीनबाग में भी ऐसी ही रणनीति अपनाई थी। आंदोलनस्थल को चारो ओर से घेर लिया गया था और सरकार की ओर से बातचीत की पहल नहीं की गई थी।

धैर्य की जंग

आंदोलन मामले में अब किसानों और सरकार के बीच धैर्य की जंग की शुरुआत हो गई है। बातचीत का नए सिरे से पहल न करने का मन बना कर सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में लंबी लड़ाई लडऩे के लिए तैयार है। जबकि किसान संगठन अरसे से लंबी लड़ाई का दावा कर रहे हैं। ऐसे में अब दोनों पक्षों के धैर्य की परीक्षा परीक्षा है। जिसका धैर्य चूकेगा, वह लड़ाई से बाहर हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की कमेटी महत्वपूर्ण

सरकार और किसान संगठनों के बीच रस्साकसी जारी रहने के कारण पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट और उसके द्वारा बनाई गई कमेटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। तीन सदस्यीय कमेटी ने एक करीब दो हफ्ते पहले काम शुरू कर दिया है। कमेटी को अगले महीने अपनी रिपोर्ट देनी है। सरकार ने भी तय किया है कि अगर किसान पुराने प्रस्ताव पर नहीं माने तो वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का इंतजार करेगी।

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