सरकार गिराए बिना नहीं बनेगी सचिन पायलट की बात

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सिंधिया के जरिए भाजपा के संपर्क में हैं पायलट.
जरूरी संख्या बल पर आश्वस्त होने के बाद ही मुखर होगी भाजपा.
केंद्रीय नेतृत्व ने फिलहाल बना रखी है पायलट से दूरी.

नई दिल्ली,12 जुलाई (आरएनएस)। राजस्थान में कांग्रेस में अंतर्कलह के चरम पर पहुंचने के बावजूद भाजपा जल्दबाजी में नहीं है। हालांकि बगावती तेवर अपनाने वाले उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिए पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं। दरअसल भाजपा नेतृत्व की रणनीति पायलट द्वारा गहलोत सरकार को गिराने केबाद ही इस मामले में आगे भूमिका निभाने की है।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व संख्या बल के मामले में आश्वस्त होना चाहता है। अब तक अधिकतम 20 विधायकोंं के पायलट के साथ होने की बात कही जा रही है। हकीकत यह है कि अब तक खुल कर महज 12 विधायक ही पायलट केसाथ हैं। उस पर यह स्पष्टï नहीं है कि ये सभी गहलोत सरकार गिराने और जरूरी पडऩे पर भाजपा में शामिल होने के लिए राजी होंगे या नहीं। फिर यह संख्या बेहद कम है। क्योंकि गहलोत सरकार को 12 निर्दलीय और छोटे दलोंं के विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।
इसलिए नेतृत्व बना रहा दूरी
पायलट के साथ भाजपा की अपेक्षा के अनुरूप विधायक न होने के कारण ही भाजपा के शीर्ष नेता खुल कर इस मामले में सामने नहींं आए हैं। पायलट फिलहाल राजस्थान इकाई के नेताओं और सिंधिया के ही संपर्क में है। ऑपरेशन मध्य प्रदेश में भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका ऐसी ही थी। कमलनाथ सरकार की विदाई की राह की सभी अड़चनें दूर होने केबाद ही गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री से ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुलाकात कराई गई थी। इससे पहले इस ऑपरेशन से राज्य के भाजपा नेता ही जुड़े थे।
गहलोत सरकार की विदाई के प्रति भाजपा आश्वस्त
भाजपा हालांकि हड़बड़ी में नहीं है, मगर उसे देर सबेर गहलोत सरकार की विदाई तय लग रही है। पार्टी के रणनीतिकारोंं का मानना है कि राज्य में गहलोत बनाम पायलट की लड़ाई जिस स्तर पर पहुंच गई है, उसका निदान निकालना मुश्किल है। कांग्रेस नेतृत्व अगर पायलट को सीएम बनाती है तो गहलोत खेमा बगावत करेगा। इसकी उल्टी स्थिति में पायलट खेमा मोर्चा खोलेगा।
भाजपा का यक्ष प्रश्न
भाजपा की दूसरी चुनौतियां भी हैं। पार्टी के 60 फीसदी से अधिक विधायक वसुंधरा राजे के कट्टïर समर्थक हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि अगर पार्टी नेतृत्व सचिन पायलट को सीएम बनाने के लिए राजी हुआ तो क्या वसुंधरा समर्थक विधायक इस आशय के निर्देश का पालन करेंगे?
गहलोत भी सरकार बचाने के प्रति आश्वस्त
उधर सीएम गहलोत भी सरकार बचाने के प्रति आश्वस्त हैं। चूंकि पायलट के साथ बहुत कम विधायकोंं ने दिल्ली कूच किया है। ऐसे में गहलोत कांगे्रस नेतृत्व को यह संदेश देने मेंं सफल रहे हैं कि उन्हें पार्टी के इतने विधायकों का समर्थन हासिल है जिससे सरकार की स्थिरता पर कोई आंच नहीं आएगी। यही कारण है कि कांग्रेस नेतृत्व ने भी फिलहाल पायलट को फौरी तौर पर महत्व नहीं देने की रणनीति बनाई है।

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