
नैनीताल (आरएनएस)। मौनी अमावस्या का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन स्नान, दान और पितृ तर्पण करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या इस वर्ष रविवार को मनाई जा रही है। आचार्य पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार इस बार अमावस्या पर विशेष ग्रह योग बन रहे हैं, जिन्हें शुभ माना जा रहा है।
आचार्य जोशी ने बताया कि 18 जनवरी को मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य की एक साथ स्थिति के कारण चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा। इसके बाद सायं 4:21 बजे चंद्रमा के मकर राशि में प्रवेश करते ही यह योग पंचग्रही योग में परिवर्तित हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस दिन पूरे समय सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा, जिससे पूजा-पाठ और दान का महत्व और बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि पितरों के तर्पण के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक किया गया तर्पण पितरों को संतोष प्रदान करता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। स्नान और दान के लिए प्रातः ब्रह्म मुहूर्त 4:43 बजे से 5:23 बजे तक का समय श्रेष्ठ बताया गया है।
आचार्य जोशी के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 10:14 बजे से प्रभावी होकर अगले दिन 19 जनवरी की सुबह 7:11 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि से द्वापर युग का प्रारंभ माना जाता है, इसलिए इस दिन नए कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी गई है। वहीं जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो, उनके लिए इस दिन दूध, चावल, खीर, मिश्री या बताशे जैसे सफेद पदार्थों का दान विशेष फलदायी माना गया है।



