
अल्मोड़ा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से 1 से 30 जून तक चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने जिले के विभिन्न गांवों में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। कार्यक्रमों में करीब 143 किसानों ने भाग लिया, जिनमें बड़ी संख्या में महिला कृषक भी शामिल रहीं। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मीकांत के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम विकासखंड हवालबाग के हवालबाग, रेलाकोट, नौगांव, खूंंट और चाण गांवों के साथ ही विकासखंड ताकुला के लोद गांव में संपन्न हुए। इस दौरान किसानों को संतुलित एवं वैज्ञानिक उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, फसल विविधीकरण तथा दलहनी और तिलहनी फसलों के उत्पादन संबंधी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण और फसल उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह देते हुए हरित खाद, जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्राकृतिक और जैविक खेती की तकनीकों, कम लागत वाली खेती, मक्का और मोटे अनाजों की उन्नत उत्पादन तकनीकों तथा फॉल आर्मीवर्म जैसे कीटों के नियंत्रण के उपायों की भी जानकारी दी गई। किसानों को मृदा एवं जल संरक्षण, भूमि की जलधारण क्षमता बढ़ाने और मृदा अपरदन रोकने संबंधी उपायों से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने दलहन एवं तिलहन विकास योजनाओं के तहत उपलब्ध सुविधाओं, उन्नत बीजों और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों को फसल चक्र में दलहनी और तिलहनी फसलों को शामिल करने के लिए प्रेरित किया। संवाद सत्र के दौरान किसानों ने जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान तथा उन्नत बीजों की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी उठाए, जिनका वैज्ञानिकों ने समाधान किया। कार्यक्रमों का संचालन संस्थान के वैज्ञानिकों की विभिन्न टीमों ने किया। इनमें डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अमित कुमार, डॉ. डी.सी. जोशी, डॉ. जय प्रकाश आदित्य, डॉ. प्रकाश घासल, डॉ. नवीन, डॉ. अमित ठाकुर, डॉ. आर.के. खुल्बे और डॉ. महेंद्र भिंडा सहित अन्य वैज्ञानिक शामिल रहे।


