
रुड़की(आरएनएस)। पिछले वर्ष अक्तूबर माह में गंगनहर की सफाई के दौरान की गई लापरवाही अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। गंगनहर से निकाली गई सिल्ट को कई स्थानों पर हटाने के बजाय नहर के किनारों पर ही एकत्रित कर दिया गया, जिससे न केवल सौंदर्य बिगड़ा है बल्कि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंगनहर के बांयी ओर कई जगह सिल्ट के ढेर आज भी जस के तस पड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से बीते वर्ष अक्तूबर में गंगनहर को बंद कराकर उसकी सफाई कराई गई थी। सफाई के दौरान जेसीबी आदि मशीनों से नहर से गाद, बालू तो निकाली गई, लेकिन उसे निर्धारित स्थान पर डालने या हटाने की बजाय नहर किनारे ही छोड़ दिया गया। गंगनहर किनारे स्थित शिव मंदिर के पास स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। मंदिर के घाट पर भारी मात्रा में सिल्ट जमा होने के कारण घाट की लगभग सभी सीढ़ियां बालू और गाद में दब चुकी हैं। ऐसे में मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गंगनहर से जल लेने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। फिसलन और असंतुलन के कारण हादसे का डर भी बना रहता है, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए। श्रद्धालु विपिन कुमार, राजन कुमार, विक्की आदि का कहना है कि गंगनहर सफाई अभियान का उद्देश्य नहर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाना था, लेकिन आधा-अधूरा काम परेशानी को और बढ़ा रहा है। लोगों ने संबंधित विभाग से सिल्ट को जल्द हटाने और घाट की सीढ़ियों को साफ कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह सिल्ट बरसात में बहकर फिर नहर में चली जाएगी, जिससे जल प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कहा है कि सफाई कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही सिल्ट को नहर किनारों से हटाकर सुरक्षित स्थान पर डंप कराया जाए, ताकि श्रद्धालुओं और आमजन को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि गंगनहर केवल जलधारा ही नहीं, बल्कि आस्था भी है। ऐसे में इसकी सफाई में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। शहर विधायक प्रदीप बत्रा का कहना है कि वह इस संबंध में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करेंगे।

