
जयपुर। कांग्रेस के विधायकों ने अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध में जाकर करीब डेढ महिने पहले इस्तीफे दिए थे। इन इस्तीफों पर क्या कार्रवाई हुई? यह इस्तीफे स्वीकार किए गए या फिर अस्वीकार किए गए? इन इस्तीफों को प्रोसेस में लाया भी गया या फिर नहीं? ऐसे कई सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। इस मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी एक शब्द भी बोलने को तैयार नहीं है।
विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी ने शुक्रवार को विधानसभा में बने म्यूजियम को लेकर एक प्रेसवार्ता की। इस प्रेसवार्ता में वे इन इस्तीफों को लेकर किसी भी तरह का जवाब देने से बचते रहे। पत्रकारों ने उनसे म्यूजियम को छोड़ सिर्फ दो ही सवाल किए। एक तो ये कि विधायकों के इस्तीफों को लेकर क्या कार्रवाई की गई? दूसरा सवाल यह पूछा गया कि क्या विधायकों के इस्तीफे उनके सरकारी आवास से विधानसभा में आ गए हैं? इन दोनो ही सवालों पर विधानसभा अध्यक्ष ने सिर्फ एक ही जवाब दिया। उन्होंने बोला ‘नमस्कार’ , आप का बहुत बहुत धन्यवाद। यह कह कर वे कुर्सी से ही उठ खड़े हुए। उन्होंने कहा कि यह प्रेसवार्ता म्यूजियम के सम्बन्ध में ही बुलाई गई है। किसी अन्य विषय पर वे कोई बात नहीं करेंगे।
डेढ माह पहले हुआ था भारी बवाल
कांग्रेस में करीब डेढ माह पहले भारी बवाल मचा था। कांग्रेस आलाकमान ने विधायकों की राय जानने के लिए दो पर्यवेक्षक मल्लिकाअर्जुन खरगे और अजय माकन को जयपुर भेजा था। कांग्रेस के एक गुट के कई विधायक नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के घर इकटृठा हो गए। देर रात तक दोनो पर्यवेक्षक विधायकों को इंतजार करते रहे, लेकिन कुछेक विधायकों को छोड कोई भी पर्यवेक्षकों के सामने नहीं गया। इसे लेकर काफी हंगामा भी हुआ और मामला दिल्ली तक भी पहुंचा। तीन नेताओं को नोटिस भी जारी किए गए थे।

