
हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के आचार्य और योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पासपोर्ट से जुड़े करीब 15 वर्ष पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सह आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को भी दोषमुक्त घोषित किया।
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) संदीप सिंह भंडारी की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में सफल नहीं हो सका। इसके बाद दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
यह मामला तत्कालीन अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष द्वारा राष्ट्रपति को भेजी गई शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आचार्य बालकृष्ण नेपाल के मूल निवासी हैं और उन्होंने कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया। शिकायत के आधार पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2011 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। मामले में नरेश चंद्र द्विवेदी पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने का आरोप था।
अदालत के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि लंबी न्यायिक प्रक्रिया उनके लिए बेहद कठिन रही और इस दौरान उन्हें अपमान तथा मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अंततः सत्य की जीत हुई और उन्हें न्याय मिला।

