
कोटद्वार(आरएनएस)। वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा एवं वन्यजीव जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। सिविल क्षेत्र में लग रही आग से आरक्षित वन क्षेत्र को भी खतरा बना है। अभी तक वनाग्नि से क्षेत्र में हुए नुकसान की वास्तविक जानकारी वन विभाग के पास नहीं है लेकिन दुगड्डा वन रेंज के अंतर्गत मटियाली, नौड़ी, आमसौड़, चौकीसेरा और आसपास के क्षेत्र वनाग्नि की दृष्टि से अतिसंवेदनशील बने हैं। लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज का नौड़ी क्षेत्र अपनी नैसर्गिक छटा के लिए जाना जाता है। वन संपदा एवं वन्यजीवों की भरमार है। ग्रीष्मकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में लगी आग पर ग्रामीणों द्वारा नियंत्रण नहीं किए जाने से वह आरक्षित वन क्षेत्र में पहुंचकर वनसंपदा को क्षति पहुंचा रही है। दुगड्डा रेंज का क्षेत्रफल 8,140 हेक्टेयर है। इसमें मटियाली, नौड़ी, आमसौड़, चौकीसेरा के निकटवर्ती वन क्षेत्र इस समय अतिसंवेदनशील बने हैं। मटियाली का आरक्षित वन क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। वहीं, नौड़ी वन क्षेत्र कोटरी रेंज व केटीआर के प्लेन रेंज से सटा हुआ है। यह भी वनाग्नि की घटना होने पर अतिसंवेदनशील बन जाता है। वन क्षेत्र में वनाग्नि की घटना के बाद विभाग की ओर से क्षति का मूल्यांकन तो किया जाता है लेकिन इसमें वन्यजीव जंतुओं की वास्तविक क्षति का मूल्यांकन करना वन विभाग के लिए चुनौती बना है। केवल बड़े वन्यजीवों की वनाग्नि से हुई क्षति का पता चल पाता है। दुगड्डा रेंज के रेंज अधिकारी रमेशचंद्र सिंह नेगी का कहना है कि इस वर्ष रेंज की सीमा में वनाग्नि की घटना नहीं हुई है।

