

विकासनगर। बैंकों के निजीकरण समेत अन्य कई मुद्दों को लेकर बैंक कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। हालांकि हड़ताल के दूसरे दिन कुछ बैंकों के ताले खुले रहे, लेकिन कर्मचारियों ने लेनदेन से संबंधित कोई काम नहीं किया। बैंकों में लेन देन नहीं होने कारण एटीएम में दिन भर लंबी लाइनें लगी रही।
दो दिनों की हड़ताल के चलते पछुवादून में वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में 30 और 31 मार्च को भी बैंकों में ग्राहकों के लिए सेवा पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। हड़ताल में शामिल बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के सभी सरकारी लेन देन को 31 मार्च से पहले खातों में डालना पड़ता है। लिहाजा अंतिम दो दिनों से क्लोजिंग से संबंधित कामकाज की निपटाया जा सकता है। इससे आम ग्राहकों को माह के अंतिम दो दिनों में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बैंक कर्मियों का कहना है कि बैंकों के निजीकरण के विरोध में हड़ताल करना जरूरी हो गया था। इसके साथ ही सरकार से बेड लोन की वसूली के लिए तंत्र विकसित करने और जमा पर ब्याज दर बढ़ाए जाने की मांग भी की जा रही है। जबकि ग्राहकों के लिए सर्विस चार्ज कम करने और पुरानी पेंशन योजना को लागू किए जाने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी गई है। पीएनएबी ऑफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांतिराम नौटियाल ने बताया कि विकासनगर में राष्ट्रीयकृत बैंक संचालित होते हैं। प्रत्येक बैंक में हर दिन बड़ी मात्रा में लेनदेन होता है। दो दिन की हड़ताल से सभी बैंकों में चेक क्लीयरेंस समेत नगदी लेनदेन में डेढ़ सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही भारतीय जीवन बीमा निगम और डाकघर में भी लेनदेन ठप रहा। हालांकि मंगलवार शाम तक सभी एटीएम से नगदी निकासी हो रही थी। लेकिन बैंक अधिकारियों का कहना है बुधवार से एटीएम में नगदी का संकट पैदा हो सकता है।

