Skip to content

RNS INDIA NEWS

आपकी विश्वसनीय समाचार सेवा

Primary Menu
  • मुखपृष्ठ
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • राज्य
    • उत्तराखंड
      • अल्मोड़ा
      • उत्तरकाशी
      • ऊधम सिंह नगर
      • बागेश्वर
      • चम्पावत
      • नैनीताल
      • पिथौरागढ़
      • चमोली
      • देहरादून
      • पौड़ी
      • टिहरी
      • रुद्रप्रयाग
      • हरिद्वार
    • अरुणाचल
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तर प्रदेश
    • गुजरात
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
      • शिमला
      • सोलन
    • दिल्ली
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • मणिपुर
    • राजस्थान
    • त्रिपुरा
  • अर्थ जगत
    • बाजार
  • खेल
  • विविध
    • संस्कृति
    • न्यायालय
    • रहन-सहन
    • मनोरंजन
      • बॉलीवुड
  • Contact Us
  • About Us
  • PRIVACY POLICY
Light/Dark Button
Watch
  • Home
  • राज्य
  • उत्तराखंड
  • देहरादून
  • वैज्ञानिकों का दावा: एक दिन में नहीं आ सकता सैलाब, कुछ दिन पहले हो गयी होगी शुरूआत
  • देहरादून

वैज्ञानिकों का दावा: एक दिन में नहीं आ सकता सैलाब, कुछ दिन पहले हो गयी होगी शुरूआत

RNS INDIA NEWS 07/02/2021
rns featured image new

देहरादून। ऋषिगंगा घाटी में रविवार को आया सैलाब सिर्फ एक दिन की घटना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना की शुरूआत कम से कम एक दिन पहले हो चुकी थी। ग्लेशियर टूटने की वजह से पहले झील बनी और फिर झील टूटने से ऋ षिगंगा में सैलाब आया। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ एमपीएस बिष्ट ने बताया कि रविवार सुबह ऋषिगंगा घाटी में आया सैलाब सीधे ग्लेशियर टूटने की वजह से होने की संभावना कम है।
उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि ऋषिगंगा कैचमेंट एरिया के त्रिशूल और रामणी ग्लेशियर के ठीक बीच में स्थित ड्योटी नामक स्थान पर ग्लेशियर का हिस्सा टूट गया होगा जो ऋषिगंगा में पहुंच गया। ग्लेशियर का टूटा हिस्सा बहुत बड़ा होने की संभावना बहुत कम है। ऐसा लग रहा है कि ग्लेशियर की वजह से नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हुआ और फिर वह कृत्रिम झील कुछ देर में टूट गई जिससे ऋषिगंगा में बाढ़ आ गई।
हालांकि बाढ़ का पानी बहुत अधिक नहीं था। उन्होंने बताया कि रैणी और तपोवन में नदी में पानी का स्तर तीन मीटर से अधिक नहीं था। जो कर्णप्रयाग में आते आते डेढ़ मीटर तक रह गया। ऐसे में बहुत बड़ा ग्लेशियर या झील टूटने की घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर का छोटा हिस्सा टूटा जिससे नदी ब्लॉक हो गई और उसके टूटने से ही ऐसी स्थिति पैदा हुई।

ऋषिगंगा कैचमेंट एरिया में हैं 14 ग्लेशियर

नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के ऋषिगंगा कैचमेंट एरिया में कुल 14 ग्लेशियर हैं जो 52 स्कायर किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं। इनमें रौथी ग्लेशियर, पिथार ग्लेशियर, त्रिशूल ग्लेशियर, दक्षिणी ऋषि ग्लेशियर, दक्षिणी नंदा देवी ग्लेशियर, उत्तरी नंदा देवी ग्लेशियर, उत्तरी ऋषिगंगा ग्लेशियर, चंगबंग ग्लेशियर, ऋषिकोट रामणी ग्लेशियर और हनुमान ग्लेशियर शामिल हैं।

संकरी घाटी की वजह से बढ़ा प्रवाह

ऋषिगंगा नदी नंदादेवी पर्वत के ठीक नीचे सरसो पातल से शुरू होती है। इस नदी पर पहला गांव रेणी पड़ता है। उसके बाद तपोवन गांव पड़ता है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ एमएपीएस बिष्ट ने बताया कि सरसो पातल से लेकर तपोवन तक घाटी बहुत संकरी है इस वजह से सैलाब का वेग बढ़ गया। लेकिन जैसे ही घाटी कुछ चौड़ाई लिए है वहां से नदी का जल स्तर कुछ कम हो गया।

शेयर करें..

Post navigation

Previous: चमोली में ग्लेशियर टूटने के बाद अब तक 10 शव मिले
Next: सोलानी नदी के पास रहने वाले लोगों को किया अलर्ट

Related Post

rns featured image new
  • उत्तराखंड
  • देहरादून

उत्तराखंड के सभी थानों को बम से उड़ाने की धमकी, हरियाणा के युवक पर केस

RNS INDIA NEWS 23/06/2026 0
rns featured image new
  • देहरादून

सड़क हादसे में घायल सभासद की उपचार के दौरान मौत

RNS INDIA NEWS 23/06/2026 0
rns featured image new
  • देहरादून

सड़क हादसे में शिवपुरी चौकी प्रभारी की मौत

RNS INDIA NEWS 23/06/2026 0

यहाँ खोजें

Quick Links

  • About Us
  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY

ताजा खबर

  • राशिफल 24 जून
  • खेत बचाओ अभियान के तहत वैज्ञानिकों ने किसानों को किया जागरूक
  • मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 29 जुलाई से फिर आंदोलन करेंगे गुरिल्ले
  • टीबड़ी क्षेत्र में रेलवे की दस बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई
  • कोसी नदी में डूबने से दो युवकों की मौत, क्षेत्र में मचा हड़कंप
  • तहसील परिसर में शत्रु संपत्ति की ई-नीलामी को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित
Copyright © rnsindianews.com | MoreNews by AF themes.