
उत्तरकाशी(आरएनएस)। रवांई घाटी के प्रसिद्ध आराध्य देव रुद्रेश्वर महादेव की पावन पालकी का जुलाई 2026 का क्षेत्रीय भ्रमण कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। केंद्रीय मंदिर समिति की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 30 जून को तिंया थान देवता गर्भगृह से बहार निकल कर एक जुलाई को 65 गांवों के प्रसिद्ध देवराना मेले में दर्शन देंगे। इसके उपरांत पालकी विभिन्न गांवों में भ्रमण कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के अनुसार एक जुलाई को मटियाली, दो को बिंगसी, 3 को क्वाड़ी, 4 को सपेटा, 5 को मुराड़ी, 6 को तुनाल्का, 7 को मुंगरा, 8 को कोटियालगांव, 9 को सुनारा, 10 को सौदाड़ी, 11 को स्वील, 12 को ठढूंग, 13 को गैड मटियाली छानी, 14 को कंसोला, 15 को मंजियाली, 16 को नौगांव, 17 को मुलाना, 18 को देवलसारी, 19 को धारी बल्ली, 20 को नैणी, 21 को पिसांऊ, 22 को किम्मी, 23 को रस्टाड़ी, 24 को कंडाऊ, 25 को कोट मेला, 26 को थौलदार मेला, 27 को दुणी मेला तथा 28 जुलाई को बिल्ला मेले में देव डोली पहुंचेगी।
केंद्रीय मंदिर समिति के अध्यक्ष जगमोहन सिंह परमार ने बताया कि पालकी भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं को देव दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देवता का भव्य स्वागत किया जाएगा। धार्मिक यात्रा को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है और गांव-गांव में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग करने का आह्वान किया है। रुद्रेश्वर महादेव की यह यात्रा रवांई घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है, जिसमें हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
देवलसारी थान में जयवीर अध्यक्ष व विपिन फिर बने सचिव: रुद्रेश्वर देवता की देवलसारी मंदिर समिति के 13 गांवों की बैठक में सर्वसम्मति से पूर्व कार्यकारिणी को यथावत रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में जयवीर परमार को पुनः अध्यक्ष, विपिन रमोला को सचिव तथा सोवेंद्र सिंह रावत को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। समिति का कार्यकाल पांच वर्ष निर्धारित किया गया है। कार्यकारिणी में प्रत्येक गांव से दो-दो सदस्यों को भी शामिल किया गया। बैठक में आगामी 1 जुलाई से शुरू होने वाले रुद्रेश्वर देवता के क्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी ग्राम प्रधानों से सहयोग का आह्वान किया गया।
पुनः दायित्व मिलने पर पदाधिकारियों ने देवता के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करने का भरोसा दिलाया। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता की।
