

देहरादून। उत्तराखंड में रोडवेज बसों के संचालन पर संकट गहराने लगा है। कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने एक नवंबर से अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार का ऐलान किया है। प्रबंधन के साथ वार्ता विफल होने के बाद यूनियन आंदोलन की तैयारी में जुट गई है। इससे प्रदेशभर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। खासकर लंबी दूरी और मैदानी मार्गों पर यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
रोडवेज प्रबंधन के सामने यह चुनौती ऐसे समय में आई है, जब दिल्ली में एक नवंबर से बीएस-4 मानक वाली पुरानी बसों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू होने की तैयारी है। इससे दिल्ली मार्ग पर बसों की उपलब्धता और संचालन व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती आवाजाही के बीच कर्मचारियों का कार्यबहिष्कार रोडवेज के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है।
कर्मचारी यूनियन ने देहरादून, नैनीताल और टनकपुर मंडल की सभी इकाइयों से आंदोलन सफल बनाने का आह्वान किया है। यूनियन का दावा है कि लंबी दूरी और मैदानी मार्गों पर संचालित बसों का 70 प्रतिशत से अधिक संचालन उसके संगठन से जुड़े चालक और परिचालक करते हैं। ऐसे में कर्मचारियों के काम से विरत रहने पर इन मार्गों पर बस सेवाएं सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन भुगतान, महंगाई भत्ता और बोनस का भुगतान शामिल है। इसके अलावा बस बेड़े में वृद्धि कर यात्रियों को पर्याप्त बसें उपलब्ध कराने, निजी वाहनों की अवैध डग्गामारी पर अंकुश लगाने और निजी बसों के परमिट जारी करने पर रोक लगाने की मांग भी की जा रही है।
यूनियन इससे पहले 23 अक्टूबर को एक दिवसीय कार्यबहिष्कार कर चुकी है। संगठन के अनुसार, उस दिन प्रदेशभर में बसों का संचालन 70 प्रतिशत से अधिक प्रभावित हुआ था। हल्द्वानी डिपो में आठ और काठगोदाम डिपो में 10 बसें निरस्त करनी पड़ी थीं। देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार सहित कई प्रमुख मार्गों पर यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा था।
इस बीच उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन ने भी आंदोलन को समर्थन दे दिया है। संगठन के प्रदेश महामंत्री रविनंदन कुमार के अनुसार, शुक्रवार और शनिवार को संगठन नैतिक समर्थन देगा, जबकि एक नवंबर से इंप्लाइज यूनियन भी पूरी तरह हड़ताल में शामिल होगी। वहीं, कर्मचारी यूनियन ने रोडवेज प्रबंधन पर वार्ता सफल होने और आंदोलन टलने का झूठा दावा करने का आरोप लगाया है। यूनियन का कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।




