

अल्मोड़ा। मानसखण्ड विज्ञान केंद्र, अल्मोड़ा में शुक्रवार को बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से आयोजित कार्यशाला में एसएसजे विश्वविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों तथा गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के शोधार्थियों सहित 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में पेटेंट प्रक्रिया, बौद्धिक संपदा के संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान में नवाचार की भूमिका पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम में एसएसजे विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. जीसी शाह मुख्य अतिथि रहे। मानसखण्ड विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र जोशी ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन सत्र में जुड़े और प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। वैज्ञानिक अधिकारी एवं सह-प्रभारी डॉ. प्रियंका अधिकारी ने वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के संरक्षण में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में यूओयू हल्द्वानी के प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार भट्ट ने ऑनलाइन माध्यम से ‘नवाचार एवं इसकी भविष्य की संभावनाएं : वर्तमान परिदृश्य में बौद्धिक संपदा अधिकार’ विषय पर व्याख्यान दिया। एसएसजे विश्वविद्यालय के विधि संकाय की डॉ. फरहा दीवा ने ‘पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया’ विषय पर भारत में पेटेंट पंजीकरण के कानूनी प्रावधानों, पेटेंट अधिनियम-1970 और आवेदन की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी। वहीं जीबी पंत संस्थान कोसी के वरिष्ठ अध्येता डॉ. बसंत सिंह ने प्राकृतिक जैव संसाधनों से उपयोगी यौगिकों के निष्कर्षण की पर्यावरण अनुकूल तकनीक, उसके वैज्ञानिक आधार और पेटेंट योग्य नवाचार में अनुसंधान को बदलने के अनुभव साझा किए। कार्यशाला का समन्वयन प्रदीप तिवारी ने किया।



