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  • चमोली

पीएमओ के निर्देश के बाद बदरीनाथ में तप्तकुंड के पानी के स्रोत का अध्ययन हुआ शुरू

RNS INDIA NEWS 05/01/2026
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चमोली(आरएनएस)।  प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश के बाद बदरीनाथ धाम में तप्तकुंड के प्राकृतिक स्रोत का अध्ययन शुरू हो गया है। भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान (आइआइआरएस) के विज्ञानियों की टीम गर्म पानी के मूल स्रोत का अध्ययन करने के लिए बदरीनाथ पहुंच गई है। टीम मंदिर के आसपास के पूरे क्षेत्र में जमीन का अध्ययन कर उसकी गहराई की वास्तविक परिस्थितियों का अवलोकन भी करेगी। बीते अक्टूबर में अलकनंदा नदी के तट पर बदरीनाथ महायोजना के तहत चल रहे रिवर फ्रंट के कार्य रोक दिए गए थे। अब दोबारा यह कवायद शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बदरीनाथ महायोजना में अलकनंदा नदी के किनारे रिवर फ्रंट के कार्य हो रहे हैं। इसके तहत डेढ़ किमी क्षेत्र में दो वर्ष से सुरक्षा दीवार का निर्माण किया जा रहा है। बदरीनाथ मंदिर के ठीक नीचे तप्तकुंड के पास पुराने पुल से लेकर ब्रह्मकपाल तीर्थ तक 150 मीटर क्षेत्र में रिवर फ्रंट के कार्य अक्टूबर 2025 में रोक दिए गए थे। क्योंकि, स्थानीय निवासियों ने तप्तकुंड और नारदकुंड के जलस्रोत को नुकसान पहुंचने और मंदिर को खतरा होने का अंदेशा जताया था। उनका तर्क था कि नदी के बहाव से छेड़खानी होने के कारण मानसून अवधि में ब्रह्मकपाल तीर्थ जलमग्न हो गया था। स्थानीय निवासियों, हक-हकूकधारियों और पंडा-पुजारियों ने कार्यों के निरीक्षण को पहुंचे पीएमओ अधिकारियों के सामने भी यह बात रखी थी। इसके बाद पीएमओ की ओर से आइआइटी रुड़की, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून और आइआइआरएस के विज्ञानियों की टीम को गर्म पानी के स्रोतों की सुरक्षा व मंदिर के आसपास की सुरक्षा के लिए कार्ययोजना बनाने का जिम्मा सौंप दिया गया।
धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं गर्म जलस्रोत:   बदरीनाथ धाम में मंदिर के आसपास कई प्राकृतिक जलस्रोत हैं। धाम में मुख्य पुजारी के रूप में जब नये रावल का तिल पात्र होता है तो इन्हीं प्राकृतिक स्रोतों की जलधाराओं में उन्हें स्नान करना पड़ता है।  दर्शन के लिए जाने से पूर्व श्रद्धालु भी तप्तकुंड में स्नान करते हैं। रावल को भी पूजा-अर्चना से पहले गर्म जलधारा में स्नान करना होता है। अलकनंदा के किनारे नारद कुंड से ही आदि शंकराचार्य ने भगवान बदरी विशाल की मूर्ति को निकालकर मंदिर में स्थापित किया था।
बदरीनाथ महायोजना के कार्य
पहला चरण : सड़कों का विस्तार, झीलों के सुंदरीकरण के साथ अंदरुनी रास्ते सिविक एनिमिटी, टूरिस्ट मैनजमेंट सेंटर का निर्माण किया जा चुका है।
दूसरा चरण: रिवर फ्रंट के कार्य, पुलों का निर्माण, ईवी ट्रेक के निर्माण के साथ चिकित्सालय निर्माण, तीर्थ पुरोहित आवास का निर्माण किया जा रहा है।
तीसरा चरण: मंदिर के 75 मीटर गोलाकार क्षेत्र में सुंदरीकरण का कार्य होना है।

अध्ययन के बाद विज्ञानियों की ओर से सुनिश्चित किया जाएगा कि महायोजना के दौरान सुंदरीकरण और रिवर फ्रंट के कार्यों से बदरीनाथ मंदिर व प्राकृतिक जलस्रोतों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। साथ ही प्राकृतिक स्रोत अपनी दिशा भी न बदलें।  – योगेश मनराल, अधिशासी अभियंता, प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट, लोनिवि

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