
विकासनगर(आरएनएस)। इन दिनों पछुवादून के अस्पतालों में ‘हे फीवर’ के मरीज अधिक आ रहे हैं। हालांकि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, बावजूद इसके चिकित्सक इस बीमारी से बचने के लिए सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं। इस बीमारी में लोगों को सुबह उठते ही लगातार छींकें आती हैं और उनकी नाक बहने लगती है। उप जिला चिकित्सालय में इन दिनो आठ से दस ऐसे मरीज हर दिन उपचार के लिए आ रहे हैं। उप जिला अस्पताल की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी कठैत ने बताया कि अक्सर लोग इसे बदलते मौसम या प्रदूषण का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे एक और गंभीर वजह एलर्जिक राइनाइटिस हो सकती है। यह नाक से जुड़ी एक एलर्जिक कंडीशन है। इसमें व्यक्ति की नाक किसी एलर्जेन (जैसे धूल, परागकण, धुआं, पालतू जानवरों के रोएं या फफूंद) के संपर्क में आते ही सेंसिटिव हो जाती है। इससे नाक में इंफ्लेमेशन (सूजन) होती है और व्यक्ति को बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक बंद होना, आंखों में पानी आना और कभी-कभी गले में खराश जैसी परेशानी होती है।
डॉ. कठैत ने बताया कि एलर्जिक राइनाइटिस से बचाव के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना जरूरी है। जैसे एलर्जेन-प्रूफ बेडिंग का इस्तेमाल करना, बेडरूम की हवा को साफ और नमी-रहित रखना, सोने से पहले शावर लेना, पालतू जानवरों को बेडरूम से दूर रखना, समय पर एंटीहिस्टामिन लेना, बेडिंग को हफ्ते में एक बार गर्म पानी से धोना और खिड़कियां बंद रखना।

