
रुद्रपुर(आरएनएस)। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से एमबीबीएस सीटों की मान्यता नहीं मिलने के बाद मंगलवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में राजकीय मेडिकल कॉलेज की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में सीडीओ, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य, कार्यदायी संस्था, प्रोजेक्ट प्रबंधक, ठेकेदार और अन्य अधिकारियों ने निर्माण कार्य और एनएमसी की ओर से बताई गई कमियों पर विस्तार से चर्चा की। जिलाधिकारी ने शेष निर्माण कार्य और आवश्यक व्यवस्थाएं अगले 15 दिनों में पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि दोबारा निरीक्षण से पहले सभी कमियां दूर की जा सकें। एनएमसी की निरीक्षण रिपोर्ट में फैकल्टी की भारी कमी, अधूरी आधारभूत संरचना और आवश्यक संसाधनों की कमी सामने आई थी।
मान्यता के लिए न्यूनतम 81 फैकल्टी सदस्यों की आवश्यकता है, जबकि निरीक्षण के समय कॉलेज में अपेक्षित संख्या उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा भवन निर्माण, पुस्तकालय, छात्रावास और अस्पताल की व्यवस्थाएं भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गईं। इसी आधार पर फिलहाल एमबीबीएस सीटों की मान्यता नहीं दी गई। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, एनएमसी के नियमों के तहत कॉलेज के पास अभी दो अवसर शेष हैं। पहली अपील 15 दिनों के भीतर की जाएगी, जिसके बाद एनएमसी की टीम दोबारा निरीक्षण करेगी। यदि उस निरीक्षण में भी कमियां मिलती हैं तो रिपोर्ट के बाद फिर 15 दिनों के भीतर अपील का एक और अवसर मिलेगा। इसके बाद अंतिम निरीक्षण कर एनएमसी अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी करेगी।मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ.उषा रावत ने बताया कि फैकल्टी की कमी दूर करने के लिए निदेशालय को प्रोफेसर और अन्य शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव भेजा गया है। वर्तमान में कॉलेज में 22 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि नौ अन्य शिक्षकों के चयन परिणाम जल्द आने की उम्मीद है। अगले सप्ताह से इंटरव्यू शुरू कर फैकल्टी की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। बैठक में बताया गया कि फर्नीचर का लगभग 20 प्रतिशत कार्य शेष है, जबकि प्रशासनिक भवन, छात्रावास सहित अन्य निर्माण कार्य करीब 90 प्रतिशत पूरे हो चुके हैं। कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए हैं कि सभी शेष कार्य 15 दिनों के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं, ताकि अगली एनएमसी निरीक्षण टीम के सामने कॉलेज सभी मानकों पर खरा उतर सके।
