लुमती-धुरुडी में फंसे लोगों के लिए देवदूत बने सेना के जवान

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पिथौरागढ़। लुमती-धुरुडी में में फंसे प्रभावितों को वहां से निकालने के लिए आफत की बारिश के बाद सेना के जवान देवदूत बनकर गांव तक पहुंचे। उन्होंने उफनाती दुगड़ी गाड़ को पार कर प्रभावितों के लिए अपने राहत के हाथ बढ़ाए हैं। बारिश में उफनाए नालों में बह गए रास्तों के बीच प्रकृति के ताडंव के सामने दो दिन से सेना की रेस्क्यू टीम भी लाचार रही। बारिश के कहर से सीमांत मुनस्यारी,धारचूला के लोग सहमे हुए हैं। गोरीछाल के लुम्ती,धुरुडी सहित अन्य स्थानों में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान किया जा रहा है। दुगडीगाड़ में रस्सी लगाकर फंसे ग्रामीणों को निकाला जा रहा है। जिसमें आईटीबीपी,एसडीआरएफ,पुलिस व राजस्व की टीमें फंसे लोगों को निकालने में जुटी हुई है। लगातार हो रही बारिश से नदियों व गाड़-गधेरों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। जिससे नदी किनारे रह रहे लोगों में दशहत बनी हुई है। सीमांत में अतिवृष्टि के बाद लुमती में 80 से अधिक लोग मदद के लिए 36 घंटे से रेस्क्यू टीम की राह देखते रहे । वहां जमीन से जुड़े सभी रास्ते सब तरफ से ध्वस्त हैं। गांव को जोडऩे वाला चामी में गोरी नदी में बने मोटर पुल के बह जाने से यहां के लोग पूरी दुनियां से कट चुके हैं। मंगलवार को भारी बारिश में पुल बह गया। दोनों तरफ नदियों से घिरे इस गांव में अब पैदल रास्ते भी पहुंचने लायक नहीं बचे हैं। दिन में बारिश के कारण हेलीकॉप्टर से भी रेस्क्यू नहीं हो सका। सेना के जवानों ने दुगड़ी गाड़ में देर शाम तार डालकर गांव वालों तक पहुंचने का प्रयास किया। जिसमें वे सफल रहे। लंबे इंतजार के बाद सेना के जवानों को अपने बीच देखकर प्रभावितों को राहत महसूस हुई। देर रात तक कई लोगों को वहां से निकाल लिया गया ।गांव में फंसे 60से अधिक लोगों को अब गुरुवार को निकालने की कोशिश की जाएगी। बहरहाल लंबे इंतजार के बाद ही सही सेना के जवानों ने लुमती पहुंचकर प्रभावितों का मुश्किल समय में दृढ़ता से साथ दिया है।

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