
हल्द्वानी। कुमाऊं में अब करीब 20 फीसदी और कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) के दायरे में आ सकते हैं। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) का लाभ लेने वाले कर्मचारियों को भी पीएफ से जोड़ने की व्यवस्था और मूल वेतन की 25 हजार रुपये तक की सीमा के चलते पीएफ लाभार्थियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे कर्मचारियों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
कुमाऊं में वर्तमान में करीब 3.25 लाख कर्मचारी पीएफ योजना से जुड़े हैं। इनकी भविष्य निधि करीब 3500 संस्थानों के माध्यम से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में जमा होती है। पीएफ का दायरा बढ़ने के साथ इन संस्थानों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारी भी इसके दायरे में आ सकते हैं, जो अभी भविष्य निधि योजना से बाहर हैं।
पहले 15 हजार रुपये प्रति माह से अधिक कमाने वाले नए कर्मचारियों के लिए ईपीएफ ढांचे में शामिल होना आवश्यक नहीं था। नई सीमा के तहत अब 15 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह के बीच कमाने वाले पात्र कर्मचारियों को अनिवार्य ईपीएफ बचत के साथ पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
पीएफ में कर्मचारी के वेतन और नियोक्ता की ओर से निर्धारित अंशदान जमा किया जाता है। सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी को एकमुश्त राशि का लाभ मिलता है। खाते में जमा रकम पर 8.25 प्रतिशत ब्याज मिलने से भविष्य निधि की राशि में भी वृद्धि होती है।
ईपीएफओ आयुक्त हल्द्वानी आकाश वर्मा ने कहा कि नए प्रावधानों का उद्देश्य अधिक से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। कुमाऊं में पहले से पीएफ से जुड़े 3.25 लाख कर्मचारियों के अलावा अब करीब 20 फीसदी अतिरिक्त कर्मचारियों के जुड़ने की संभावना है।

