

देहरादून। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीट आवंटन मामले की जांच के बीच देहरादून कलेक्ट्रेट परिसर स्थित सरकारी जनाधार केंद्र बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने केंद्र में तैनात तीनों कर्मचारियों को हटा दिया है। जांच पूरी होने के बाद नए कर्मचारियों की तैनाती कर केंद्र दोबारा खोला जाएगा।
जांच में सामने आया था कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित बनकर फर्जी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए गए थे। ये प्रमाणपत्र देहरादून के जनाधार केंद्र से जारी हुए थे। मामले में डीएम डॉ. आशीष चौहान ने दो पटवारियों को निलंबित करने के साथ संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त कराए थे। डीएम ने बताया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
जांच में देहरादून के सदर क्षेत्र से तीन और ऊधमसिंह नगर के गदरपुर से नौ फर्जी प्रमाणपत्र सामने आए थे। अन्य तहसीलों से भी तीन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। इस मामले ने प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उधर, तहसील सदर न्यायालय से वर्ष 2019 में जरूरी पत्रावली गायब होने के मामले में शहर कोतवाली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया है। नवंबर 2024 में दी गई शिकायत पर पहले गुमशुदगी दर्ज की गई थी, लेकिन चोरी का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। तहसीलदार सुरेंद्र देव के अनुसार, पत्रावली संपत्ति विवाद से जुड़े मामले की थी और गायब मिलने के बाद प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई थी।



