
अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी एवं दुग्ध संघ अल्मोड़ा की प्रबंध समिति के सदस्य ब्रह्मानंद डालाकोटी ने दुग्ध समितियों और दुग्ध संघ के चुनाव के लिए वर्तमान नियमावली में संशोधन तथा नामांकन शुल्क कम किए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री और दुग्ध विकास मंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि समितियां लंबे समय से यह मांग कर रही हैं, लेकिन सरकार हर वर्ष मौजूदा नियमों के तहत चुनाव कराती जा रही है। डालाकोटी ने कहा कि वर्तमान नियमावली के कारण अल्मोड़ा दुग्ध संघ की करीब दो-तिहाई समितियां चुनाव लड़ने के लिए अर्ह ही नहीं हो पातीं। जो समितियां पात्र बनती भी हैं, उनमें से अधिकांश की प्रबंध समितियां एक-दो वर्ष के भीतर भंग हो जाती हैं और लगभग 90 प्रतिशत समितियां अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि प्रबंध समिति सदस्य के लिए 500 रुपये का नामांकन शुल्क भी दुग्ध उत्पादकों के लिए अधिक है। अधिकांश छोटे दुग्ध उत्पादक प्रतिमाह 1000 से 2000 रुपये का दूध समिति को देते हैं, ऐसे में अधिक शुल्क के कारण वे चुनाव लड़ने में रुचि नहीं लेते। एक समिति के चुनाव पर नामांकन शुल्क और अन्य खर्च मिलाकर करीब सात हजार रुपये का व्यय आता है, जो कई समितियों के एक माह के दुग्ध बिल के बराबर है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान नियमों के कारण पांच वर्ष के लिए चुनी गई समितियों को भी समय से पहले भंग कर दोबारा चुनाव कराए जाते हैं। उनका कहना है कि डेरी विकास विभाग ने समितियों के सुझावों पर विचार करने के बजाय एक प्रपत्र भेजकर वर्तमान नियमों और शुल्क के साथ चुनाव कराने की सहमति लेने का प्रयास किया है। ब्रह्मानंद डालाकोटी ने बताया कि इस बार भी कई समितियों ने चुनाव कराने में असमर्थता जताते हुए इसका विरोध किया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दुग्ध समितियों की विधियों एवं उपविधियों में आवश्यक संशोधन तथा चुनाव शुल्क में कमी किए जाने के बाद ही चुनाव कराए जाएं।


