
अल्मोड़ा। कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं के लोकतांत्रिक संघर्ष और विपक्ष की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों मेहनती युवाओं और उनके परिवारों की उम्मीदों को चोट पहुंचाई है। छात्र-छात्राएं वर्षों की मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक होने से उनका भविष्य और परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होता है। रविवार को कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में तिवारी ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्र किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि अपने भविष्य और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे युवा थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय आंदोलन दबाने का प्रयास किया और छात्रों पर लाठीचार्ज कराया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने परीक्षा की गोपनीयता भंग होने के बाद जवाबदेही तय करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की थी और अंततः सरकार को जनदबाव के आगे झुकना पड़ा। तिवारी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुरू से ही युवाओं की आवाज सड़क से लेकर संसद तक उठाई। उन्होंने कहा कि यह किसी दल की राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों की लड़ाई थी। उन्होंने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने, भर्ती एजेंसियों में सुधार करने तथा प्रश्नपत्रों की गोपनीयता सुनिश्चित करने की मांग की। विधायक तिवारी ने उत्तराखंड में सामने आए पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने में विफल रही है। उन्होंने प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही कहा कि भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पत्रकार वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह भोज, महानगर अध्यक्ष ताराचंद्र जोशी, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष राधा बिष्ट, पूर्व दर्जा मंत्री पूरन रौतेला, कांग्रेस ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष पारस नाथ गोस्वामी, हर्ष कनवाल सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
