
चमोली(आरएनएस)। भालू के हमले में गंभीर रूप से घायल लक्ष्मी देवी घटना के नौ घंटे तक जिंदगी और मौत से लड़ती रही। लेकिन समय पर उचित उपचार नहीं मिलने से उसकी जीवन लीला समाप्त हो गई। सीएचसी पोखरी से जब उसे हायर सेंटर रेफर किया गया तो ग्रामीणों ने हेलिकॉप्टर की मांग की। प्रशासन ने इसके लिए प्रयास भी किए, लेकिन खराब मौसम का हवाला देते हुए प्रशासन ने सड़क मार्ग से ही महिला को लेकर जाने को कहा। श्रीनगर के पास उसकी मौत हो गई। यदि हेलिकॉप्टर से महिला को ले जाया जाता तो समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बचाई जा सकती थी।
नैल ग्राम पंचायत के सिदेली गांव में सुबह आठ बजे घटना हो गई थी। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर आए। जब लक्ष्मी देवी को हायर सेंटर रेफर किया गया तो परिजनों ने प्रशासन से हेलिकॉप्टर की मांग की। ताकि सड़क मार्ग से लगने वाला समय बच जाए। लेकिन प्रशासन ने मौसम का हवाला देते हुए सड़क मार्ग से ही मरीज को हायर सेंटर ले जाने की बात कही।
बेहतर उपचार मिलने से महिला की जान बच सकती थी: दोपहर करीब 12 बजे वे हायर सेंटर के लिए निकले। श्रीनगर के पास करीब तीन बजे उसकी मौत हो गई। घटना नौ घंटे बाद महिला ने दम तोड़ा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि हेलिकॉप्टर आ जाता तो महिला समय पर बड़े अस्पताल में पहुंच जाती, जिससे बेहतर उपचार मिलने से महिला की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
तहसीलदार रामकिशोर ध्यानी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर महिला को हायर सेंटर ले जाने के लिए हेलिकॉप्टर की व्यवस्था की गई थी। लेकिन मौसम खराब होने के चलते हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया। ऐसे में महिला को एंबुलेंस से ही हायर सेंटर रेफर किया गया।

