
देहरादून(आरएनएस)। मसूरी के नजदीकी गांव बंग्लों की कांडी बूढ़ी दिवाली पर पारंपरिक लोक रंगों से गुलजार रही। बंग्लों की कांडी की पनीर विलेज के रूप में पहचान है और यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी है। यहां बूढ़ी दिवाली को भाड़ का पर्व के रूप में मनाया जाता है। यहां पारंपरिक रिवाज और उल्लास के साथ यह लोक पर्व मनाया गया। जंगल से घास लाकर उसकी रिस्सयां बनाई गईं और फिर पारंपरिक पूजा अर्चना के बाद 50 फिट लंबी रस्सी के साथ खेल खेला गया। इस दौरान पारंपरिक भेषभूषा में सजी टीमें दर्शकों का रोमांच बढ़ा रही थीं। टीम के एक तरफ पुरुष और एक ओर महिलाओं की टीम थी। नाचते गाते रस्सी को गांव के चौक तक लाये व वहां पर जमकर नृत्य किए गये। जिसमें तांदी, रासौ, हारूल आदि प्रमुख हैं। पूरा गांव बूढी दीवाली के पर्व पर एकत्र था व सभी मिलकर इस पर्व को उत्साह के साथ मना रहे थे। देर रात होल्डे जलाकर नृत्य किया गया। इस दौरान गांव आये मेहमानों व गांव की ब्याहताओं को इस पर्व पर बनाये जाने वाले विशेष पकवान स्वालां पकोड़ी, चूड़ा व भोजन परोसा गया। इस अनोखे पर्व का आनंद लेने बंग्लों की कांडी में पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचे। इस पर्व व यहां की लोक संस्कृति का जमकर आनंद लिया। इस मौके पर विरेंद्र रावत, रैपाल सिंह रावत, सुनील नौटियाल, किशन सिंह पंवार, सुरेद्र नौटियाल, अरविंद शर्मा, विनोद नौटियाल अन्य मौजूद रहे।

