
रानीखेत। मोहन वन क्षेत्र के डबरा सौराल, तडम और काठ की नाव क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी, गश्त और बाघ रेस्क्यू अभियान चालू है। उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत की ओर से गठित टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार कैंप कर बाघ की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और उसे सुरक्षित रेस्क्यू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वन विभाग की टीमों ने क्षेत्र में बाघ के पद चिन्हों और अन्य गतिविधियों की पहचान के लिए निगरानी बढ़ा दी है। बाघ की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए दो ड्रोन लगाए गए हैं, जबकि दो लाइव कैमरा और 21 कैमरा ट्रैप समेत अन्य उपकरण विभिन्न स्थानों पर स्थापित किए गए हैं। बाघ को रेस्क्यू करने के लिए पांच पिंजरे भी लगाए जा चुके हैं। गश्ती दल नियमित रूप से पिंजरों, कैमरा ट्रैप और अन्य उपकरणों की जांच कर रहा है। मानव-वन्यजीव संपर्क की संभावनाओं को कम करने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों, स्थानों और संपर्क मार्गों के आसपास झाड़ी कटान का कार्य भी कराया जा रहा है। यह कार्य फिलहाल प्रगति पर है। डॉक्टरों की टीम भी रेस्क्यू दल के साथ लगातार क्षेत्र में मौजूद रहकर बाघ को सुरक्षित पकड़ने के प्रयासों में सहयोग कर रही है। रेस्क्यू अभियान में कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का सहयोग भी लिया जा रहा है। वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को वन्यजीवों से सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए गांवों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं। लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सावधानी बरतने की जानकारी देने के साथ ही जनजागरूकता गोष्ठियां भी आयोजित की जा रही हैं। टीमों को रेस्क्यू अभियान के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ तैनात किया गया है। अभियान में रामनगर वन प्रभाग, कालागढ़ टाइगर रिजर्व और अल्मोड़ा वन प्रभाग की रानीखेत, जौलासी, धाराहाट और अल्मोड़ा रेंज की टीमें भी सहयोग कर रही हैं। सभी टीमें क्षेत्र में कैंप कर गश्त, निगरानी, प्रचार-प्रसार और जागरूकता अभियान संचालित कर रही हैं।

