

देहरादून। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की उत्तराखंड के मूल निवासियों को लेकर की गई कथित ‘घुसपैठिया’ टिप्पणी पर प्रदेश में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे उत्तराखंड के लोगों के स्वाभिमान और राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष से जोड़ा। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तराखंड देवभूमि और वीरभूमि है। यहां के लोगों ने देशसेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल उनके सम्मान और संघर्ष का अपमान है। धामी ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार और समाजवादी पार्टी के शासनकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए संघर्ष करने वाले आंदोलनकारियों के बलिदान को उत्तराखंड के लोग नहीं भूल सकते।
धामी ने कांग्रेस से भी पूछा कि क्या वह अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी का समर्थन करती है। उन्होंने कांग्रेस से इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड कभी एक ही राज्य का हिस्सा थे। राज्य विभाजन के समय जो लोग जिस क्षेत्र में रह गए, वे वहां के सम्मानित नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जिससे किसी क्षेत्र के लोगों के सम्मान को ठेस पहुंचे।
इस विवाद के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने धामी की प्रतिक्रिया के जरिए कांग्रेस से सवाल उठाए हैं, जबकि हरीश रावत ने भाषा की मर्यादा और दोनों राज्यों के साझा इतिहास पर जोर दिया है।
फिलहाल, विवाद अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी और उसके संदर्भ को लेकर केंद्रित है। मूल बयान का पूरा संदर्भ सामने आने पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह टिप्पणी किन परिस्थितियों में और किस संदर्भ में की गई थी।




