
हाथरस कांड
प्रयागराज,09 अक्टूबर (आरएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाथरस की सामूहिक दुष्कर्म पीडि़ता के परिवार की याचिका को खारिज कर दिया है। पीडि़त परिवार ने आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी कि जिला प्रशासन ने उनको घर पर अवैध रूप से कैद कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है। कोर्ट के आदेश पर याचियों को सुरक्षा दी गई है। ऐसे में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने पीडि़ता के पिता ओम प्रकाश और 6 अन्य की याचिका पर दिया है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सोनीपत (हरियाणा) के अखिल भारतीय वाल्मीकि महापंचायत के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र कुमार ने भी दाखिल की थी।
याचियों का कहना था कि वाट्सएप संदेश के जरिये पीडि़ता के परिवार ने महमूद प्राचा व अन्य को वकील बनाया है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पर आपत्ति की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका विचाराधीन है। कोर्ट के आदेश पर पीडि़ता के परिवार व गवाहों को सुरक्षा दी गयी है। परिवार ने किसी को भी वकालतनामे देकर याचिका दाखिल करने के लिए अधिकृत नहीं किया है। उन्होंने कहा कि किसे कौन नियुक्त करना चाहता है, यह साफ नहीं है।


