

अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में जनजातीय उपयोजना के तहत 15 दिवसीय कार्यक्रम शुरू किया गया। उद्घाटन सत्र में संस्थान के आठ वैज्ञानिकों सहित करीब 26 लोगों ने प्रतिभाग किया। इनमें देहरादून के धनपौ गांव की 10 महिला किसान और चमोली के बाम्पा, मलारी व परसारी गांवों के किसान शामिल रहे। डॉ. निर्मल हेडाऊ ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और जनजातीय समाज के उत्थान में उनके योगदान की जानकारी दी। वहीं डॉ. बीएम पांडे ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय किसानों से संवाद कर उनकी जरूरतों और सुझावों के आधार पर कृषि विकास गतिविधियों को प्रभावी बनाना है। परिचर्चा में किसानों ने हींग की खेती, हेजलनट, चेस्टनट, अखरोट और नींबू की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही स्थानीय स्तर पर पौधशालाएं विकसित करने की आवश्यकता बताई। मटर की फसल में लाभकारी बैक्टीरिया के उपयोग और चयनित गांवों में गेहूं के प्रदर्शन आयोजित करने पर भी चर्चा हुई। डॉ. राजेश खुल्बे ने देहरादून में गेहूं और लहसुन की फसल के तहत संचालित प्रदर्शनों की जानकारी दी। किसानों ने फसल विविधीकरण, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री और जैव आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने के सुझाव दिए। संस्थान ने इन सुझावों को आगामी योजनाओं में शामिल करने की बात कही।





