
कोटद्वार(आरएनएस)। उत्तराखंड एकता मंच (यूईएम) की बैठक में वक्ताओं ने उत्तराखंड में पांचवीं अनुसूची लागू करने की मांग उठाई। कहा कि पांचवीं अनुसूची संवैधानिक कवच है और 12 अन्य हिमालयी राज्यों की तर्ज पर इसे उत्तराखंड में लागू कर मूल निवासियों के अधिकार वापस किए जाने चाहिए।
नजीबाबाद मार्ग पर एक वेडिंग प्वाइंट में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मूल निवासियों को ट्राइब का दर्जा और पांचवीं या छठी अनुसूची का संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल आरक्षण की मांग नहीं, बल्कि चीन और नेपाल की सीमा से लगे संवेदनशील राज्य की सुरक्षा और हिमालय को बचाने की लड़ाई है।वक्ताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची लागू होने से जन सांख्यिकीय असंतुलन पर रोक, सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, सख्त भू-कानून और मूल निवास 1950 की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। जल, जंगल और जमीन आधारित संसाधनों से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रिवर्स पलायन होगा। साथ ही संस्कृति और भाषा का संरक्षण, महिला सुरक्षा, भूमिहीन किसानों के अधिकार और ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिल सकेंगे। बैठक में हरिद्वार से सुशील रावत, देहरादून से अनूप बिष्ट और शंकर मठ आश्रम रुड़की के महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद भारती ने विचार रखे। इस दौरान राम कंडवाल, महिमानंद डोबरियाल, महेंद्र रावत, महेंद्रपाल सिंह रावत, अनुसूया सेमवाल, प्रवेश नवानी, उम्मेद सिंह रावत आदि मौजूद रहे।

