
देहरादून(आरएनएस)। सहस्रधारा रोड तरला नांगल स्थित पुश्तैनी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये में बेच दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजपुर पुलिस ने दून वैली कोलोनाइजर एंड बिल्डर कंपनी के निदेशक प्रदीप नागरथ और उनके साथी केके सोइन के खिलाफ फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाकर फर्जीवाड़ा करने की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तरला नागल निवासी नूर हसन ने बताया कि उनके पूर्वज करीमुद्दीन की मृत्यु वर्ष 1996 में हो गई थी। आरोपी केके सोइन ने 1990 की एक पावर ऑफ अटॉर्नी का उपयोग करते हुए 19 जुलाई 2001 को दून वैली बिल्डर के साथ एक अपंजीकृत एमओयू साइन कर लिया।
आरोपियों ने साजिश के तहत एकल मध्यस्थता केस दायर कर 18 बीघा जमीन (जिसमें उनका का भी हिस्सा है) के फर्जी विक्रय पत्र तैयार करवा लिए। इसका पता पीड़ित को लगा। आरोप है कि पुलिस अधीक्षक को शिकायत देने और क्षेत्राधिकारी मसूरी की 21 अक्तूबर 2024 की जांच रिपोर्ट में मामला सही पाए जाने के बावजूद पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। निचली अदालत से भी प्रार्थना पत्र खारिज होने पर पीड़ित ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तुरंत केस दर्ज करने के निर्देश दिए। एसओ पीडी भट्ट ने बताया कि दोनों आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस विवादित जमीन को खरीदने वालों की भी अब चिंता बढ़ गई है।

