
विकासनगर(आरएनएस)। चिह्नीकरण की लंबित मांग को लेकर मंगलवार को उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का गुस्सा फूट पड़ा। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच पछवादून के बैनर तले बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों ने बाबूगढ़ से तहसील मुख्यालय तक विरोध जुलूस निकाला। तहसील मुख्यालय पहुंचने के बाद आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द चिह्नीकरण की प्रक्रिया बहाल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मंच के महासचिव जयकृष्ण सेमवाल ने कहा कि चिह्नीकरण की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित होने के कारण पात्र राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल शासनादेश जारी कर चिह्नीकरण की प्रक्रिया बहाल करनी चाहिए। लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाना आंदोलनकारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलनकारियों के सब्र की परीक्षा न ले। वर्षों से चिह्नीकरण प्रक्रिया ठप होने के कारण ऐसे अनेक पात्र लोग अपने अधिकारों के लिए भटक रहे हैं, जिन्होंने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द शासनादेश जारी कर प्रक्रिया शुरू नहीं की तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा तथा आंदोलनकारी देहरादून कूच करने के लिए मजबूर होंगे। मंच की जिला अध्यक्ष सीमा कुकरेती और यूकेडी के ब्लॉक अध्यक्ष सौरभ उनियाल ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर आंदोलनकारियों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य की नींव आंदोलनकारियों और मातृशक्ति के संघर्ष पर टिकी है, लेकिन दुर्भाग्य है कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों, उनके परिवारों और आश्रितों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। प्रदर्शन करने वालों में सुनीता देवी चमोली, राजेश्वरी भट्ट, संगीता भट्ट, विमला कपूर, सुरेश चंद्र भट्ट, कमला घिल्डियाल, मनोरमा डोभाल, मायाराम ममगाईं, अनिल पंवार, मंगनानंद डोभाल, लायक राम गोदियाल, लक्ष्मण सिंह नेगी, अमरदेव जोशी, सुरेंद्र बिष्ट, उषा जोशी, ऊषा काला, विनीता चौहान, रंजना बडोनी आदि शामिल रहे।

