
अल्मोड़ा। पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को मानसखण्ड विज्ञान केंद्र और उत्तराखण्ड वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विज्ञान केंद्र परिसर स्थित जैव विविधता पार्क में वृक्षारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान करीब 50 चौड़ी पत्ती वाले पौधे रोपित किए गए और पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में बांस, उतीस, भीमल, तेजपत्ता, कचनार, हरड़ और बहेड़ा सहित विभिन्न स्थानीय प्रजातियों के पौधे वैज्ञानिक विधि से लगाए गए। विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय वनस्पतियों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। मानसखण्ड विज्ञान केंद्र की उपप्रभारी डॉ. प्रियंका अधिकारी ने कहा कि केंद्र में विकसित जैव विविधता पार्क का उद्देश्य स्थानीय वनस्पतियों, औषधीय पौधों और पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के साथ विद्यार्थियों एवं आमजन में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है। उन्होंने बताया कि पार्क को प्रकृति शिक्षा की जीवंत प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एमेरिटस वैज्ञानिक डॉ. जी.सी.एस. नेगी ने उत्तराखण्ड में वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त प्रजातियों के चयन, वैज्ञानिक रोपण और पौधों के दीर्घकालिक संरक्षण पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी (सिविल एवं सोयम) प्रदीप धौलखंडी ने कहा कि बढ़ते पर्यावरणीय संकट और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए वृक्षारोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। यूकॉस्ट के सलाहकार प्रो. वी.पी. पांडे ने पौधों और वनों के पारिस्थितिक, आर्थिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं रेडक्रॉस सोसायटी के मनोज सनवाल और वसुंधरा के डॉ. रवीन्द्र जोशी ने सामुदायिक सहभागिता को पर्यावरण संरक्षण की सफलता का आधार बताया। कार्यक्रम में विज्ञान केंद्र एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों, वन पंचायत प्रतिनिधियों, पर्यावरण प्रेमियों और अन्य गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। समापन पर सभी प्रतिभागियों ने अधिकाधिक वृक्षारोपण और जैव विविधता संरक्षण का संकल्प लिया।
